व्यक्तिवाद, परिवारवाद और सुप्रीमोंवाद के मुखौटे बहुजन समाज को तबाह कर रहे है।

अभी जिस तरह से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो खेला खेला,उसको लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं समाज में देखने को मिल रही है,कई लोग इस घटनाक्रम से बहुत दुखी भी है, लेकिन यह आज के दौर की तथा व्यक्तिवाद, परिवारवाद और सुप्रीमोंवाद की एक सामान्य घटना है क्योंकि व्यक्तिवाद और सुप्रीमोंवाद में ऐसा ही होता है, बहुजन समाज के जो भी लोग इस घटनाक्रम से दुखी हैं, उन्हें यह सबक लेना चाहिए कि वे व्यक्तिवाद,परिवारवाद और सुप्रीमोंवाद को तिलांजलि देकर समाज के लिए एक मजबूत, शसक्त और व्यवस्थित तथा शक्तिशाली संगठन निर्माण करेंगे क्योंकि समाधान यही है, लेकिन यही लोग करना नहीं चाहते और जब तक यह नहीं करेंगे तब तक समाधान नहीं हो सकता।

व्यक्तिवाद, सुप्रीमोंवाद आज बहुजन समाज के युट्यूबर पत्रकार भी बड़े पैमाने पर फैला रहे है, ये खुद भी मसीहा बनने की फिराक में है, अच्छी बात है मसीहा बनने ही चाहिए लेकिन इस प्रकार के आचरण व्यवहार से कभी भी मसीहा नहीं बन सकते, बल्कि समाज को धोखा देने का कार्य ही कर रहे है।

ये ट्यूबर बड़ी बड़ी लच्छेदार भाषणों की वीडियो बनातें हैं और लिखते हैं भाजपा और कांग्रेस के लिए मुसीबत, लेकिन इनके लिए कोई भी मुसीबत नहीं है बल्कि उसने ऐसा बोला, इसने ऐसा बोला, इससे कुछ भी नहीं निकलने वाला, हां एक बात सत्य है कि बहुजन समाज का सत्यानाश जरुर ये यूट्यूबर कर रहे है क्योंकि इनकी संगठन निर्माण की प्रक्रिया और अधिक मुश्किल हो रही है, ये युट्यूबर कुछ लोगों को मसीहा बना कर पेश करते हैं जिनसे इनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ जाता है और ये अपने आप को बड़े ही फनेखां समझने लग जाते हैं, और कुछ लोग तो दुश्मन लोगों की झोली में ही जा बैठते हैं।

आप हर रोज देखते हो कि उसने ऐसा बोला,अब भाजपा और आरएसएस के लिए बन गई मुसीबत, नहीं दे पाएंगे प्रधानमंत्री जवाब,आर एस एस हिला, लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है ? बस ये युट्यूबर अपने वीडियो की रिच जरुर बढ़ा लेते है लेकिन इससे समाज ही बड़े पैमाने पर गुमराह होता है और गुमराह होने से संगठन निर्माण की प्रक्रिया से दूर भागता है और इन युट्यबर द्वारा चर्चित चेहरों का पिछलग्गू बन जाता है और संगठन निर्माण का कार्य नहीं करता,इस प्रकार ये युट्यूबर समाज का बेड़ा गर्क ही कर रहे है, बहुत कम ही इनमें समझदार है जो संगठन निर्माण की प्रक्रिया को महत्व देते हैं।

हम ब्राह्मणवादी, स्वर्ण मीडिया को कोसते हैं, ये पत्रकार भी उनसे कम ब्राह्मणवादी नहीं है, इन्होंने भी अपना एक दायरा बना लिया है, दिल्ली और इसके आसपास की घटनाओं को तो कवर करते हैं और इसमें भी जो इनके चहेते होते हैं उन्हीं को बार बार दिखाते हैं जबकि उनके पास कोई भी ठोस समाधान नहीं है, दिल्ली से दूर दराज ये तभी जातें हैं जब कोई बड़ी घटना घट जाती है, कोई मर जाता है या मार दिया जाता है या किसी बहन के साथ रेप या उत्पीड़न हो जाता है। ये उत्पीड़न,रेप, मर्डर क्यों होता है, इसके वास्तविक कारण क्या है ? इसका वास्तविक समाधान क्या होगा ? इस पर इनका कोई अध्ययन नहीं होता। मुझे तो लगता है कि ये शायद इसी इंतजार में रहते हैं कि कब कोई बड़ी घटना घटे और ये उसको कवर करें तथा अपनी रिच की बढ़ोतरी करें। आजकल कई पत्रकार तो दिल्ली में बैठकर ही अपने वीडियो डालते रहते हैं, बहुजन समाज के लोगों से मेरी अपील है कि आप एक बार सोचिए इनके हर रोज के लच्छेदार वीडियो से क्या समाधान हुआ ? समाधान शसक्त और मजबूत तथा व्यवस्थित संगठन बनाने से ही होगा, इसके संबंध में ये क्या कर रहे है ? मैं मानता हूं कि इनकी अपनी रोजी रोटी की भी समस्या है जिसके चलते इन्हें कई बार बड़ी परेशानी का सामना भी करना पड़ता है लेकिन इनके अधिकांश वीडियो में संगठन निर्माण की प्रक्रिया गायब ही रहती है। ठीक है अपना और अपने परिवार का पेट पालन का ध्यान रखते हुए कुछ वीडियो संगठन निर्माण और संगठन के महत्व पर भी होने चाहिए लेकिन इसकी तरफ इनका जरा सा भी ध्यान नहीं है। केवल और केवल कुछ व्यक्तिगत, चर्चित हस्तियों के अलावा आमजन की वास्तविक समस्या से इनका कोई भी सरोकार नहीं है।

इन्हें आज खुद का भी मूल्यांकन करना चाहिए कि इनके वीडियो डालने से क्या समाज में संगठन निर्माण हुआ ? क्या व्यक्तिवाद सुप्रीमोंवाद परिवारवाद का खात्मा हुआ ? मैं ऐसा सवाल इसलिए रख रहा हूं क्योंकि जो आज हम नीतिश कुमार को जो दोष दें रहें हैं,कल यही दोष दूसरे को देंगे फिर तीसरे को, यह ऐसा ही चलता रहेगा क्योंकि जब तक मजबूत संगठन निर्माण नहीं होगा और नेताओं पर समाज और संगठन का नियंत्रण नहीं होगा, यह ऐसा ही होता रहेगा और आज इसी प्रक्रिया को बढ़ावा दें रहें हैं हमारे युट्यूबर , जिन्हें हम बहुजन मीडिया कह रहे हैं लेकिन मेरे विचार से यह बहुजन मीडिया नहीं है बल्कि ब्राह्मणवादी मीडिया से भी खतरनाक मीडिया है क्योंकि यह समाज को गुमराह करने का कार्य कर रहा है, यह केवल अपने पेट पालने तक सीमित है और इसके कारण पैसों के लोभ लालच में कुछ ऐसे लोगों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाता है जो कि समाज के लिए बेहद घातक और घटिया है, जिन्हें यह मीडिया हीरो बना कर पेश करता है कल फिर वो नीतिश जैसे बन जाते हैं हालांकि नीतिश को नीतीश बनाने में इस मीडिया का इतना योगदान नहीं है लेकिन आप देखेंगे कि आज ऐसे कुछ नेता इस मीडिया द्वारा पैदा किए जा रहे हैं जो भविष्य के नीतिश कुमार होंगे और फिर समाज यहीं चिल्लाएगा कि देखो देखो ये समाज को धोखा दे रहा है, आखिर वह समाज को धोखा क्यों दे रहा है क्योंकि समाज का उस पर कोई भी नियंत्रण नहीं है ? नियंत्रण के लिए एक संगठन चाहिए और संगठन में जागरूक, जिम्मेदार और समर्पित लोग चाहिए, वह तो हमारे पास है नहीं, फिर किस तौर तरीकों से हम उस पर नियंत्रण रख सकते हैं ? इसकी तरफ हमें आज बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है।

जो भी ऐसे नेता इस मीडिया द्वारा पैदा किए जा रहे हैं,असल में ये सब ब्राह्मणवाद के लिए ही काम कर रहे है क्योंकि जितने ये चर्चित होंगे उतना ही समाज इनका पिछलग्गू होगा और इस आधार पर बड़े दलों और पार्टियों के नेता इनकी बोली लगाएंगे अर्थात अनकंट्रोल नेता ऐसा ही करते हैं, हमें इस चलन को बंद करना होगा।

आजकल कुछ नेताओं द्वारा एक गतिविधि और चलाई जा रही है,जब भी बहुजन समाज के किसी व्यक्ति के साथ कोई अमानवीय घटना घटती है तो ये नेता आह्वान करते है कि आओ फैलाने स्थान पर आओ,जल्दी पहुंचो,लोग पहुंच जाते हैं, बहुत से इन नेताओं का कोई संगठन भी नहीं है,न ही ये कोई संगठन बना रहे हैं और न ही पहले से बने संगठनों को मजबूत कर रहे है,लोग इनके आह्वान पर वहां पहुंच जाते हैं, कुछ दिन आंदोलन चलता है, कुछ केसो में पीड़ितों को लाभ मिल भी जाता है और कुछ में कई बार कोई भी लाभ नहीं मिलता, कुछ लोग इसमें सौदागिरी, दलाली भी करते हैं और कुछ लोग ईमानदारी से भी काम करतें हैं लेकिन इसका विशेष लाभ नहीं है,इसका कई बार तत्कालीक लाभ हो भी जाता है और कई बार नहीं भी होता, लेकिन यह स्थाई और ठोस समाधान नहीं है। हमें ठोस और स्थाई समाधान की ओर बढ़ना चाहिए। मेरा यह भी कहना नहीं है कि ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए लेकिन इन सभी साथियों को यह विश्लेषण जरुर करना चाहिए कि इस प्रकार की गतिविधियों से समाज पर अन्याय, अत्याचार, अपराध क्यों नहीं रुक रहें ? आखिर हमारे हक अधिकार हमसे गायब क्यों होते जा रहे हैं ? इनको कैसे प्राप्त किया जा सकता है ? इनको मजबूत संगठन निर्माण करके, कार्यकर्त्ताओं को लगातार प्रशिक्षित करके ही प्राप्त किया जा सकता है। मुझे उम्मीद है साथी इस ओर ध्यान देंगे। मेरा उन पत्रकार युट्युबर साथियों से भी आग्रह है कि उन्होंने जो आज तक किया, कृपया उसका विश्लेषण करें, उनके ऐसा करने से समाज को क्या लाभ हुआ ? और क्या नूकसान हुआ ? उनका व्यक्तिगत क्या लाभ और नूकसान हुआ ? मैं मानता हूं कि उनकी रोजी रोटी का भी प्रबंध होना चाहिए लेकिन इसके लिए समाज के लोगों को ध्यान देना चाहिए और उन्हें भी सोचना चाहिए कि वे इस समाधान की दिशा में और अधिक कैसे बढ़ सकतें हैं ? या अपनी रोजी रोटी को चलाते हुए पत्रकारिता का कुछ हिस्सा संगठन निर्माण को भी दें, बहुजन समाज के लोगों से भी आग्रह है कि व्यक्तिवादी, परिवारवादी, सुप्रीमोंवादी नेताओं से किनारा करते हुए सांगठनिक नेताओं को, नियंत्रित नेताओं महत्व दें, क्योंकि शोशल मीडिया या प्रिंट मीडिया से पैदा हुए नेता के बारे में आप उससे अच्छी तरह से परिचित नहीं है, उसके आचरण व्यवहार का आपको उतना ज्ञान नहीं होता और आप इन सबके अभाव में उसे अपना नेता समझने लग जाते हो जबकि उससे अच्छा नेता आपके आस पड़ोस में भी हो सकता है लेकिन आप उसकी एक दो कमी को जानते है इसलिए उसको नजरंदाज कर देते हो लेकिन जिसे अब आप नेता समंझ रहे हो, हो सकता है कि उसमें उससे भी अधिक कमियां हो लेकिन फिर भी उसे आप अपना नेता मानते हों क्योंकि उसके बारे में आप अनभिज्ञ हो, इसलिए इसका समाधान सांगठनिक नेता से ही हो सकता है। आइए सांगठनिक नेता को महत्व दें, सांगठनिक बनें, नियंत्रित बने, अनुशासित बनें, प्रशिक्षित बनें क्योंकि यही समाधान है।


धन्यवाद
सुरेश द्रविड़

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