साल 2021 बामसेफ और ऑफशूट विंग्स के लिए चुनौतियों का साल रहा, लेकिन कई चुनौतियों के बाद भी कार्यकर्ताओं ने पूरी लगन और मेहनत के साथ काम किया और चुनौतियों से भरे साल को पार किया। साल जरूर बदला हैं लेकिन न ही चुनौतियां कम हुई हैं और न ही कार्यकर्ताओं की हिम्मत। हम सभी कार्यकर्ता एक नए जोश के साथ तैयार हैं अपने महापुरखों के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए। बामसेफ के राष्ट्रीय संगठन सचिव मू संजय मोहिते ने एमएनटी न्यूज नेटवर्क के लाइव कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा। “वर्ष 2022 में मूलनिवासी बहुजन समाज के आंदोलन के सामने चुनौतियां और मुकाबला” इस विषय पर मू संजय मोहिते जी ने दिनांक 4 जनवरी को लाइव कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।
मूलनिवासी बहुजन समाज के आंदोलन के सामने की चुनौतियों को पहचानना आवश्यक है, इस बात पर जोर देते हुए आपने कहा कि, भारतीय संविधान को लागू करने की प्रक्रिया पिछले 70 सालों से चल रही है फिर भी जातिगत भेदभाव, जाति आधारित शोषण, वंचित जातियों की महिलाओं पर बलात्कार, हत्या, अशिक्षा, निजीकरण की वजह से आई बेरोजगारी, किसानों की बर्बर स्थिति, मंत्रिमंडल में न्यायपालिका में और प्रशासन में प्रतिनिधित्व की कमी, जो यंत्रणाएं सरकार के पास है उन यंत्रणाओं ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण फैलाने की जिम्मेदारी न लेते हुए अवैज्ञानिक दृष्टिकोण से लोगों को प्रक्रिया में ले जाना, लिंगभेद, लाखों किसान आर्थिक समस्याओं के कारण ख़ुदकुशी के मार्ग पर चलना पड़ा, हर रोज लाखों असंगठित मजदूर अपना पेट पालने के लिए अपना घर छोड़कर रोजगार पाने के लिए बड़े-बड़े शहरों के रास्तों पर खड़े हैं, लाखों लोगों को योग्य और सही समय पर स्वास्थ्य सुविधा न मिलने पर यातनाएं झेलने पर मजबूर है, हमारे करोड़ों बच्चे शिक्षा के निजीकरण की तथा भेदभाव पूर्ण शिक्षा नीति के कारण प्राथमिक तथा उच्च शिक्षा से वंचित है। यह सारी समस्याएं हमारे सामने पिछले 70 सालों में आई है जो नहीं आनी चाहिए थी। अगर हम इसका निचोड़ करते हैं तो पिछले एक दशक से यह समस्याएं और ज्यादा गंभीर होती जाती दिखाई दे रही है। इनमें से हमने 5 समस्याओं को प्रमुख रूप से चिन्हित किया है।
इस देश की जो संसदीय संस्थाएं हैं जिनके माध्यम से लोगों का कल्याण होना है उन सभी संसदीय संस्थानों पर अतिक्रमण होते हुए आज हमें देखने को मिल रहा है।भारतीय संविधान पर भी अतिक्रमण होते हुए दिखाई दे रहा है। कार्यपालिका (प्रशासकीय) व्यवस्था पर भी अतिक्रमण हो रहा है। न्यायपालिका पर अतिक्रमण की प्रक्रिया हमें दिखाई पड़ रही है और ब्राह्मणवादी शक्तियां इस देश में हावी हो गयी है।
भारतीय संविधान के तहत लोगों को हक-अधिकार देने जिम्मेदारी शासन व्यवस्था पर है। लोक कल्याण की जिम्मेदारी व्यवस्था पर है। लेकिन आज इस जिम्मेदारी की तरफ नजरअंदाजी होते हुए दिखाई दे रही है।
क्योंकि आज ऐसी बातें सामने आ रही है कि, समाज के मध्यम वर्ग का तबका और उससे भी नीचे जो लोग हैं, जो असंगठित मजदूर है उनकी समस्याएं कम होने की बजाए और बढ़ती दिखाई दे रही है। इन लोगों को अपनी छोटी-छोटी समस्याएं सुलझाने के लिए बार-बार आंदोलित होना पड़ रहा है। बेरोजगारी की भीड़ इस देश में कम होती नहीं दिखाई दे रही है। और सरकार जिनके ऊपर इनके जीवन की जिम्मेदारी है वह अपनी जिम्मेदारी से दूर भाग रही हैं।
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