भगवती प्रसाद पुरोहित के खिलाफ मूलनिवासी महिलाओं का जनसैलाब।

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चमोली में सैकड़ो महिलाओं ने किया विरोध प्रदर्शन।

अभद्र भाषा के प्रयोग से फिर घिरा भगवती प्रसाद पुरोहित।

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बीते चार मार्च को मूलनिवासी संघ के बैनर तले सैकड़ो मूलनिवासी महिलाओं ने जिला चमोली में मनुवादी मानसिकता वाले शिक्षक भगवती प्रसाद पुरोहित द्वारा अपनी किताब में महिलाओं के खिलाफ किये अभद्र भाषा के प्रयोग का विरोध किया । इस विरोध प्रदर्शन में संगठन के जिला व राज्य स्तर के कई महिला पदाधिकारी उपस्थित रही।

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एक बार फिर मनुवादी मानसिकता से ग्रसित भगवती प्रसाद पुरोहित विवादों में फसा हुवा हैं। बता दे कि यह वही भगवती प्रसाद पुरोहित हैं जिसने साल दो हजार सौलह में संविधान निर्माता डॉ० बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी ।

जिसके बाद भगवती प्रसाद को मूलनिवासी बहुजन समाज के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। इस घटना के बाद भगवती पर मूलनिवासी बहुजन समाज ने एससी, एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसका मामला अभी तक नैनीताल हाई कोर्ट में लंबित चल रहा हैं।

बताते चले कि इस मामले के समय आरोपी भगवती प्रसाद पुरोहित महाविद्यालय गोपेश्वर में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत था। लेकिन अब जिले से बाहर किसी महाविद्यालय में कार्यरत हैं।

यह एक मामला नहीं हैं, बल्कि इसके अलावा भी भगवती प्रसाद कई बार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ों के खिलाफ विवादित बयान दे चुका हैं।

हाल ही में यह एक बार फिर विवादों में घिरा हुआ हैं। आरोप है कि भगवती प्रसाद ने अपनी किताब में मूलनिवासी बहुजन समाज की महिलाओं पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया हैं। जिसके विरोध में बीते दिनों जिला चमोली में मूलनिवासी संघ के बैनर तले सैकड़ो महिलाओ ने भगवती प्रसाद पुरोहित के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी की मांग की है।

इस विरोध प्रदर्शन में युवा, बुजुर्ग , महिलाओं समेत कई विभिन्न संगठनों ने सहभाग किया । इस मौके पर मूलनिवासी संघ महिला विंग की जिला प्रभारी मू० पुष्पा कोहली मेडम, राज्य उपाध्यक्ष मू० अंजू अग्निहोत्री मेडम औऱ राज्य प्रभारी मू० आशा टम्टा मेडम शामिल हुई।

उपस्थित सभी लोगो को मू० आशा टम्टा मेडम ने संबोधित किया जिसमें उन्होंने महिलाओं के हर तरह के विकास के लिए बाबा साहेब और भारतीय संविधान के महत्व को समझाया।

उन्होंने उपस्थित सभी लोगो को भारत के संविधान और मूलनिवासी पहचान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि, “आज मूलनिवासी बहुजन समाज की महिलाएं जो अपनी अस्मिता की लड़ाई लड़ने के लिए सक्षम हुई है, वह सब भारत के संविधान की बदौलत और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की संविधान की रचना से प्राप्त हुआ है।”

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