बीते दिनों बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई पर दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्चय न्यायालय ने गुजरात सरकार को फटकार लगाया हैं। कोर्ट ने कहा कि, समय से पहले दोषियों को रिहा करने से पहले अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए था।
=======
मालूम हो कि बीते साल पंद्रह अगस्त , दो हजार बाईस को अपनी क्षमा नीति के तहत गुजरात की भाजपा सरकार द्वारा बिलकीस बानो सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सभी ग्यारह दोषियों को सौलह अगस्त, दो हजार बाईस को गोधरा के उप-कारागार से रिहा कर दिया गया था।
जिसके बाद सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध किया गया । हजारो कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जाहिर किया था। इसके अलावा सैकड़ों महिला कार्यकर्ताओं समेत छह हजार से अधिक लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से दोषियों की सजा माफी का निर्णय रद्द करने की अपील की थी।
उस समय पीड़िता बिलकीस बानो ने भी अपने वकील के जरिये जारी एक बयान में गुजरात सरकार से इस फैसले को वापस लेने की अपील की थी। लेकिन सरकार ने इनकी एक नहीं सुनी।
लेकिन अब दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि, समय से पहले दोषियों को रिहा करने से पहले अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए था।
पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा सरकारों से कहा कि, एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और कई लोग मारे गए। आप पीड़िता के मामले की तुलना मानक धारा तीन सौ दो (हत्या) के मामलों से नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, जैसे आप सेब की तुलना संतरे से नहीं कर सकते, वैसे ही नरसंहार की तुलना एक हत्या से नहीं की जा सकती।
जस्टिस जोसेफ ने सरकार से सवाल किया कि, क्या सरकार ने अपना दिमाग लगाया? साथ ही उन्होंने पूछा कि, सजा माफ़ी देने के फैसले का आधार क्या था? उन्होंने कहा, आज मामला इस महिला बिलकिस का है, लेकिन कल यह कोई भी हो सकता है। यह आप या मैं हो सकते हैं। एक मानक होना चाहिए। यदि आप छूट देने के अपने कारण नहीं बताते हैं, तो हम अपना निष्कर्ष निकालेंगे।’
मालूम हो कि यह ग्यारह आरोपी साल दो हजार दो के गुजरात में हुए दंगो में शामिल थे। इस घटना के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।
तीन मार्च दो हजार दो को अहमदाबाद के पास एक गांव में उन्नीस वर्षीय बिलकीस बानो के साथ ग्यारह लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। उस समय वह गर्भवती थीं। हिंसा में उनके परिवार के सात सदस्य भी मारे गए थे, जिसमें उसकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।
मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहुंचने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद मामले के आरोपियों को साल दो हजार चार में गिरफ्तार किया गया था।
जिसके ठीक चार साल बाद यानी इक्कीस जनवरी दो हजार आठ को सीबीआई की विशेष अदालत ने बिलकीस बानो से सामूहिक दुष्कर्म और उनके सात परिजनों की हत्या का दोषी पाते हुए ग्यारह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्हें भारतीय दंड संहिता के तहत एक गर्भवती महिला से बलात्कार की साजिश रचने, हत्या और गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के आरोप में दोषी ठहराया गया था।
लेकिन आज यह ग्यारह दोषी खुलेआम घूम रहे हैं। और मामले में पीड़ित बिलकिस बानो आज भी न्याय की गुहार लगा रही हैं।






