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बीजेपी ने अपने शाषण में विज्ञापनों में खर्च किये 6,491.56 करोड़ रुपये।
राज्यसभा में सूचना एवं प्रसारण मंत्री द्वारा सार्वजनिक किया गया आंकड़ा।
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सरकार द्वारा राज्यसभा में दिए गए जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने पिछले पांच सालों में विज्ञापनों पर 3,723.38 करोड़ रुपये ख़र्च किये हैं । जबकि अपने शासन के पूरे आठ सालों में विज्ञापनों में 6,491.56 करोड़ रुपये ख़र्चे किए हैं।
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बीते दिनों सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि, मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक केंद्र सरकार ने विज्ञापनों पर 154.07 करोड़ (एक सौ चौवन करोड़ सात लाख) रुपये ख़र्च किए हैं। उन्होंने बताया कि साल 2014 से केंद्र सरकार ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विज्ञापनों पर कुल 6,491.56 करोड़ (छह हजार चार सौ इक्यानवे करोड़ छप्पन लाख) रुपये ख़र्चे हैं।
जहां एक तरफ कई मौके पर सरकार ने सरकारी खजाना खाली होने की बात कहीं हैं। वही दूसरी तरफ विज्ञापनों के इतने भारी भरकम ख़र्च से कई सवाल खड़े होते हैं। जो सकरार ने कई तरीकों से अपने और अपने नीतियों के प्रचार-प्रसार में खर्च किये हैं।
अगर साल दर साल के पिछले पांच सालों के विज्ञापनों के खर्च देखें तो वित्त वर्ष 2017-18 में विज्ञापनों पर 1,220.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि 2018-19 में 1,106.88 करोड़,2019-20 में 627.67 करोड़, 2020-21 में 349.09 करोड़ और 2021-22 में 264.78 करोड़ रुपये खर्च किया गया हैं। वही मौजूदा वित्त वर्ष की बात करे तो नौ दिसंबर, 2022 तक सरकार ने विज्ञापनों पर 154.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
आंकड़ो के मुताबिक सरकार ने अपने आठ साल के कार्यकाल में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विज्ञापन पर 3,260.79 करोड़ रुपये और प्रिंट मीडिया में 3,230.77 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
मंत्री द्वारा पेश आंकड़ो के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सबसे अधिक खर्च किया गया था, जो 609.15 करोड़ रुपये था। इसके पहले 2015-16 में उसका व्यय 531.60 करोड़ रुपये और 2018-19 में 514.28 करोड़ रुपये था। जबकि प्रिंट मीडिया में दिए गए विज्ञापन का सबसे अधिक खर्च 2017-18 में था जोकि 636.09 करोड़ रुपये का था। इसके अलावा 2015-16 में यह खर्च 508.22 करोड़ रुपये और 2016-17 में 468.53 करोड़ रुपये था।






