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दिल्ली के स्कूलों का हाल है बदहाल।
प्रिंसिपल से लेकर शिक्षकों तक कि कमी।
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केजरीवाल अक्सर अपने भाषणों में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी पीठ थपथपाते नज़र आते हैं। लेकिन आंकड़ो की माने तो दिल्ली के अस्सी फीसदी सरकारी स्कूल बिना प्रिंसिपल के ही चल रही है। इसके अलावा शिक्षकों की भी भारी कमी बताई जा रही हैं।
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दिल्ली की सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर हमेसा आम आदमी पार्टी के नेता अपनी पीठ थपथपाथे हुए नज़र आते हैं । लेकिन दिल्ली की सरकारी स्कूलों के ये आंकड़े कुछ ओर ही सच्चाई बया करती हैं।
सितम्बर, दो हजार बाईस तक के आंकड़े बताते है कि दिल्ली के करीब चौरासी फीसदी सरकारी स्कूल बिना प्रिंसिपल के ही चल रही हैं। यानी इन स्कूलों में प्रिंसिपल का पद खाली पड़ा हैं।
बताते चले कि सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के कुल नौ सौ पचास पद स्वीकृत किये हैं, लेकिन इन स्कूल प्रिंसिपल के नौ सौ पचास में से सात सौ छियानवे पद खाली पड़े हैं।
इसके अलावा इन स्कूलों में वाइस प्रिंसिपल यानी उप प्रधानाचार्य के चौतीस फीसदी, शिक्षकों के तेतीस फीसदी, टीजीटी टीचर्स के चालीस फीसदी और पीजीटी के बाईस फीसदी पद खाली हैं।
आंकड़ो के अनुसार वाईस प्रिंसिपल के कुल स्वीकृत सौलह सौ सत्तर पद में से पांच सौ पैसठ पद खाली हैं। इसके अलावा सभी शिक्षकों के कुल पैसठ हजार नौ सौ उनासी स्वीकृत पदों में से इक्कीस हजार नौ सौ दस, टीजीटी शिक्षक के स्वीकृत तेतीस हजार सात सौ इकसठ में से तेरह हजार चार सौ इक्कीस और
पीजीटी में कुल स्वीकृत सतरह हजार सात सौ चौदह पद में से तीन हजार आठ सौ अठाईस पद खाली पड़े हुए हैं।ये आंकड़े स्पष्ट करती हैं कि दिल्ली की सरकारी स्कूलों की स्थिति क्या होगी।







