देश की 40% संपति मात्र 1% सबसे अमीरों तक सीमित।

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अधिकार समूह ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट।

निचले तबके के 50% आबादी के पास मात्र 3% संपति!

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भारत में आर्थिक असमानता की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। अधिकार समूह ऑक्सफैम इंटरनेशनल के मुताबिक निचले तबके के 50 फीसदी आबादी के पास मात्र तीन फीसदी हिस्सा हैं। जबकि मात्र एक फीसदी सबसे अमीरों के 40 फीसदी से अधिक की संपत्ति ।

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भारत मे समाजिक असमानता के साथ साथ आर्थिक असमानता की खाई भी इतनी गहरी हैं, जिसका दुनिया मे और कोई दूसरा उदाहरण नहीं।

भारत में आर्थिक असमानता की गहराई कितनी है वह इस बात से लगाई जा सकती हैं कि जहा नीचे से 50 फीसदी आबादी के पास देश की कुल संपति का केवल 3 फीसदी हिस्सा हैं। वही दूसरी और मात्र एक फीसदी सबसे अमीरों के पास देश की कुल संपत्ति का 40 फीसदी हिस्सा हैं।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के पहले दिन बीते सोमवार को स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में अपनी वार्षिक असमानता रिपोर्ट में अधिकार समूह ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने यह जानकारी देते हुए कहा कि, “ग़रीब अधिक करों का भुगतान कर रहे हैं, अमीरों की तुलना में ज़रूरी वस्तुओं और सेवाओं पर अधिक ख़र्च कर रहे हैं। समय आ गया है कि अमीरों पर कर लगाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे अपने उचित हिस्से का भुगतान करें।”

बताते चलें कि, देश के अमीरों की संपत्ति पर टैक्स लगाकर सरकार देश की कई गंभीर समस्याओं का समाधान कर सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 10 सबसे धनी लोगों पर 5 प्रतिशत कर लगाने से बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए पूरा धन मिल सकता है।

भारत के 10 सबसे अमीरों के नाम देखे तो उसमें गौतम अडानी एंड फैमिली, मुकेश अंबानी,राधाकृष्ण दमानी एंड फैमिली, साइरस पूनावाला, शिव नादर, सावित्री जिंदल एंड फैमिली, दिलीप सांघवी एंड फैमली, हिंदुजा बंधु, कुमार बिड़ला और बजाज फैमिली का नाम शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक अरबपति गौतम अडानी को 2017-21 के बीच मिले अवास्तविक लाभ पर एकमुश्त कर लगाकर 1.79 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं, जो भारतीय प्राथमिक विद्यालयों के 50 लाख से अधिक शिक्षकों को एक साल के लिए रोजगार देने को पर्याप्त है।’

यही नहीं, ‘सर्वाइवल ऑफ द रिचेस्ट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत के अरबपतियों की पूरी संपत्ति पर दो फीसदी की दर से एकमुश्त कर लगाया जाए, तो इससे देश में अगले तीन साल तक कुपोषित लोगों के पोषण के लिए चालीस हजार चार सौ तेईस करोड़ रुपये की जरूरत को पूरा किया जा सकता हैं ।

इस रिपोर्ट का दावा है कि, अगड़े सामाजिक वर्ग को मिलने वाले पारिश्रमिक के मुकाबले अनुसूचित जाति को पचपन प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिक को मात्र पचास प्रतिशत वेतन मिलता है।

आश्चर्य की बात यह हैं कि, जहा महामारी के दौरान गरीबो की नौकरियां छीनी हैं। वही अमीरों की संपत्ति कई गुना बढ़ी हैं। ऑक्सफैम के मुताबिक, नवंबर, 2022 तक महामारी शुरू होने के बाद से भारत में अरबपतियों की संपत्ति में 123 प्रतिशत या तीन हजार छह सौ आठ करोड़ रुपये प्रति दिन की वृद्धि देखी गई हैं। ऑक्सफैम के मुताबिक, भारत में अरबपतियों की कुल संख्या 2020 में 102 से बढ़कर 2022 तक 166 हो गई हैं।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि सरकार को मिलने वाले कुल टैक्स का आधे से अधिक हिस्सा निचले तबके की पचास फीसदी आबादी से आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में वस्तु और सेवा कर यानी जीएसटी के जरिेये कुल चौदह दशमलव तिरासी (14.83) लाख करोड़ रुपये का लगभग चौसठ फीसदी हिस्सा निचले तबके की पचास फीसदी आबादी से आया, जिसमें केवल तीस फीसद जीएसटी शीर्ष दस प्रतिशत अमीरों से आया हैं।

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