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बीते तेरह अगस्त, दो हजार तेईस को बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स द्वारा धनबाद के स्वागतम बैंक्वेट हॉल में संविधान विचार गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका विषय था, “राष्ट्रीयकरण का पैगाम, निजीकरण पर लगाम”। इस कार्यक्रम में बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स के कार्यकर्ताओं समेत भारी संख्या में मूलनिवासियों ने हिस्सा लिया।
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बीते तेरह अगस्त को धनबाद के विनोद चौक के सामने स्थित स्वागतम बैंक्वेट हॉल में बीएस फोर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान के तहत एक संविधान विचार गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में भारी संख्या में मूलनिवासियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विशेष रूप से महिलाओं की संख्या इस कार्यक्रम में अधिक रही। इसके अलावा पुरुषो और विद्यार्थियों की भी भारी संख्या इस कार्यक्रम में दिखी।
इस कार्यक्रम का विषय था, “राष्ट्रीयकरण का पैगाम, निजीकरण पर लगाम” जिसपर चर्चा हुई। इस विषय पर उद्घाटक, प्रस्तावक, अध्यक्ष , विशिष्ट अतिथि और वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
बताते चले की इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बामसेफ के राष्ट्रीय संगठन सचिव मूलनिवासी मनोज कुमार ने किया। जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना मूलनिवासी संघ के प्रदेश महासचिव मूलनिवासी वीरेंद्र कुमार और संचालन एम बी एन न्यूज नेटवर्क के सदस्य मूलनिवासी सूरज कुमार ने किया।
जबकि वक्तगणों के रूप में बामसेफ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मूलनिवासी अजय रजवार और बामसेफ के जिला अध्यक्ष मूलनिवासी दिलीप बाउरी उपस्थित रहे।
वही विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद उपाध्यक्ष, धनबाद से मूलनिवासी सरिता देवी उपस्थित रही। जबकि कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व मध्य रेल हाजीपुर के वरीय ई० डी० पी० मैनेजर मूलनिवासी चंद्रशेखर आजाद स्नेही जी ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मूलनिवासी चंद्रशेखर आजाद स्नेही जी ने कहा की, संविधान उन्नीस सौ पचास में लागू हुआ और तब से हम इस देश के नागरिक हैं अर्थात इस देश के मूलनिवासी हैं।
उन्होंने लोगो से कहा की, आपको जो कुछ भी मिल रहा हैं जैसे धन, संपत्ति, खाना, शिक्षा, कपड़ा वे सभी आपको भारत के संविधान से मिल रहा हैं।
उन्होंने लोगो से अपनी स्थिति अभी से और बेहतर बनाने के लिए संविधान को खरीदकर उसे पढ़ने की अपील की और लोगो को बताया की किस तरह भारत के संविधान में नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को साफ साफ लिखा गया हैं।
चंद्रशेखर आजाद स्नेही जी ने अपने भाषण में लोगो से अपने पूर्वजों के बारे में विचार करने का आग्रह किया और कहा की हम ही यानी एससी, एसटी, ओबीसी ही इस देश के मूलनिवासी हैं।
उन्होंने अपने भाषण में राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और माता सावित्री बाई फुले का भी नाम लिया और शिक्षा के क्षेत्र में इन दोनो के योगदान को बताया।
साथ ही उन्होंने लोगो को वोट देने के अधिकार के महत्व को समझाते हुए कहा की, वोट का मतलब आप अपने अधिकारों को अगले पांच सालों तक किसी एक के हाथ में सौंप देते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मूलनिवासी मनोज कुमार ने भी लोगो को संबोधित करते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने आंदोलन में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा किया । उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को यह पता चल जाए कि उनको क्या बोलना है ? तो आंदोलन होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
उन्होंने कहा की हमारा भारत अभी जैसा भी है, उसके जिम्मेदार हम भारत के लोग ही हैं क्योंकि संविधान की प्रस्तावना के मुताबिक एक बेहतर राज्य बनाने की जिम्मेदारी संविधान ने देश के नागरिकों को सौंपी हैं। इसलिए अगर आज हमारे देश की स्थिति ठीक नहीं है तो इसका मतलब हमे संविधान की सही जानकारी नहीं मिली है। अगर हमे संविधान की सही जानकारी होती तो आज हम एक बेहतर भारत में जी रहे होते।
उन्होंने डॉक्टर अंबेडकर के बातों को दोहराते हुए कहा की, कोई कितना भी बड़ा आदमी हो, कितना भी अच्छा बोलता हो या कितना भी अच्छा नेता हो कभी अपनी आजादी, अपनी बोलने की आजादी उसके पैरो पर समर्पण नहीं करनी चाहिए।
लेकिन आज देश में यही चीज चल रहा है। उन्होंने कहा की, डेमोक्रेसी में एक व्यक्ति के साथ हजारों – लाखों लोग चल रहे है जो डेमोक्रेसी की हत्या है।
उन्होंने कहा की साउथ यूरोप और भारत विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र हैं। जब कही भी लोकतंत्र नहीं था तब यूनान और भारत लोकतांत्रिक देश थे। लेकिन जहा एक तरफ आज साउथ यूरोप एक डेवलप कंट्री है। वहा गरीबी और भूखभरी जैसी समस्याएं नहीं है लेकिन वही दूसरी तरफ भारत में अनेकों समस्याएं हैं। साउथ यूरोप की तुलना में भारत अब भी बहुत पिछड़ा हैं।







