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‘पढ़ो प्रदेश’ योजना के तहत अब छात्रों को नहीं मिलेगा लाभ।
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मौलाना आज़ाद छात्रवृति को बंद करने के बाद सरकार अब ‘पढ़ो प्रदेश’ योजना के तहत छात्रों को मिलने वाली सहायता भी बंद कर दी हैं। बताते चले कि ‘पढ़ो प्रदेश’ योजना के तहत देश के मुश्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध आदि छात्रों को विदेशों में जाकर पढ़ने के लिए, लिए गए शिक्षा ऋण पर ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलता था। जो अब नहीं मिलेगी।
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बाबा साहेब ने कहा था कि, “शिक्षा शेरनी का दूध हैं, जो पियेगा वो दहाड़ेंगे।” और शायद इसी दहाड़ से राजनीतिक पार्टियों को डर भी लगता हैं। इसीलिए तो शिक्षा के क्षेत्र में देश वैश्विक स्तर पर पिछड़ता जा रहा हैं।
एक समय हुवा करता था जब दुनियाभर से छात्र भारत पढ़ने आया करते थे। लेकिन आज हायर एजुकेशन के लिए हर साल लाखों छात्र विदेश जाते हैं। शिक्षा का केंद्र कहे जाने वाले इस भारत मे आज एक भी यूनिवर्सिटी नही हैं जो विश्व के टॉप यूनिवर्सिटीज में शुमार हो।
सरकार की रुचि भी इस क्षेत्र में कुछ खास नहीं हैं। साथ ही हायर एजुकेशन पाने के लिए सरकारी सहायताओं से भी सरकार अपना हाथ खींच रही हैं।
हमने देखा कि कैसे सरकार ने मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप को बंद करते हुए अल्पसंख्य छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को बंद कर दिया हैं।
अब सरकार ने बौद्ध, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और मुस्लिम समुदाय के छात्रों के कल्याण के लिए दो हजार छह से चलाई जा रही ‘पढ़ो प्रदेश ‘ योजना को बंद कर दिया हैं।
बताते चलें कि इस योजना के तहत जो छात्र मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी सहित अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित थे और विदेश में मास्टर डिग्री, एमफिल और पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, वे पाठ्यक्रम अवधि के बाद एक साल या नौकरी मिलने के बाद छह महीने के लिए उनकी संपूर्ण ऋण राशि पर उन्हें ब्याज सब्सिडी मिलता था। जो अब नहीं मिलेगी।
इस योजना में पैतीस फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित रहती थी । लेकिन अब इस पर पूर्णरूप से रोक लगा दी गयी हैं। हालांकि इस योजना को बंद करने के पीछे कोई कारण नहीं दिया गया हैं। लेकिन इकतीस मार्च दो हजार बाईस तक के मौजूदा लाभार्थियों को ऋण अवधि के दौरान ब्याज सब्सिडी मिलती रहेगी।







