डॉ. के. एस. चौहान सीनियर एडवोकेट मनोनित होने पर एक-दूसरे को बधाई क्यों?

कल भारत के तमाम समाचार एजेंसियों में एक महत्वपूर्ण खबर न्यायपालिका से जुड़े हुए लोगों के बिच चर्चा में रही। खबर है कि 8 दिसंबर 2021 को भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जजों की एक फूल कोर्ट मीटिंग हुई। इस मीटिंग में एक निर्णय हुआ। निर्णय के अनुसार भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अधिसूचित किया है कि हाईकोर्ट के सात पूर्व मुख्य न्यायाधीशों व न्यायाधीशों और 18 अधिवक्ताओं तथा एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को 8 दिसंबर, 2021 से सीनियर एडवोकेट (वरिष्ठ अधिवक्ता) के रूप में नामित किया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई।

अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट के पद पर नामित करना यह सुप्रीम कोर्ट के कामकाज की महत्वर्पूण प्रक्रिया है। जैसे की हमने कहा कि सीनियर एडवोकेट के नामांकन की जानकारी पर आम तौर पर न्यायपालिका से जुड़े लोग ही अधिकतर चर्चा करते हैं। परन्तु यहां चौंकाने वाली बात यह हुयी कि इस सूचि में आये एक नाम पर देशभर से प्रतिक्रियाएं आने लगी। इस व्यक्ति को देशभर से न केवल अधिवक्ता बल्कि कई सामाजिक संगठनों और कर्मचारी संगठनों के लोग उन्हें बधाई देने लगे। देश भर से कई कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर उस शख्स को सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट बनाये जाने पर अभिनंदन के मेसेज लिखे जाने लगे और एक दूसरे को बधाई दी जाने लगी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी की गयी इस अधिसूचना की दूसरी तालिका में क्रमांक तीन पर एक नाम आया। वह है डॉ कृष्ण सिंह चौहान अर्थात डॉ. के. एस. चौहान। डॉ. के. एस. चौहान फूले-आंबेडकर आंदोलन में जाना-माना व्यक्तित्व है।

करीब साढ़े तीन दशक से अधिक समय से डॉ. के. एस. चौहान अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं, समाज को अपनी सेवा दे रहे हैं। डॉ. के. एस. चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी हुए। इसके बाद आपने दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ लॉ से एलएलएम किया। केवल यहां तक आप रुके नहीं। बल्कि आपने कानून के विषय में ही डॉक्टरेट भी हासिल की। महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, हरियाणा से आपने पीएचडी की उपाधि हासिल की। भारत के विश्वविद्यालयों और लॉ कॉलेजों में डॉ. के. एस. चौहान को कॉन्स्टिटूशनल लॉ, पब्लिक लॉ, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ आदि विषयों पर व्याख्याता के रूप में आमंत्रित किया जाता है। अनेक सामाजिक व कर्मचारी संगठन आपसे विधि परामर्श लेते हैं।

जाहिर है कि डॉ. के. एस. चौहान का नाम सीनियर एडवोकेट के रूप में अधिसूचित होने पर जगह-जगह से अभिनन्दन और बधाई के रूप में प्रतिक्रियाएं आने लगी।

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने बधाई सन्देश लिखा कि “सर्वोच्च न्यायालय के एडवोकेट Dr K S Chauhan को Senior Advocate की औपचारिक मान्यता दी गई है। इस फैसले के साथ ही भारत के आधुनिक न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा है। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले विधिवेत्ता डाक्टर चौहान का सीनियर एडवोकेट बनना ऐतिहासिक घटना है। डाक्टर चौहान आपको बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।”

आगे उर्मिलेश लिखते हैं कि “डाक्टर चौहान की नयी किताब इसी साल छपी है: Citizenship Rights & Constitutional Limitations (2021, Mohan Law House, Delhi). मेरे लिए प्रसन्नता की बात कि इस महत्वपूर्ण किताब के लोकार्पण के मौके पर मैं डाक्टर चौहान के साथ मौजूद था और किताब पर अपने संक्षिप्त विचार भी प्रकट किये थे।”

“डाक्टर चौहान संवैधानिक मामलों के न सिर्फ विशेषज्ञ हैं अपितु उन्होनें हाशिये के समूहों और अन्य लोगों को न्याय दिलाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण न्यायिक लड़ाइयां भी लड़ी हैं। इनकी किताब पर मैने पहले भी फ़ेसबुक पर कुछ टिप्पणियां की हैं।”
“सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों ने अपनी सामूहिक राय से डाक्टर चौहान को सीनियर एडवोकेट के रूप में मान्यता देकर अपना दायित्व निभाया है। मुझे लगता है, यह फैसला और पहले हो जाना चाहिए था।”
“पुनः बधाई, Dr K S Chauhan”

जाने माने पत्रकार दिलीप मंडल ने डॉ. के. एस. चौहान को बधाई देते हुए अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “सुप्रीम कोर्ट के सात दशक से भी लंबे इतिहास में पहली बार अनुसूचित जाति के एक वकील के एस चौहान, जो क़ानून के श्रेष्ठ जानकार है, को “सीनियर एडवोकेट” बनाया है। 8 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की बैठक में ये फ़ैसला हुआ।”
“चौहान सर को बधाई। आप सब को भी बधाई।”
आगे पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं –
“यह एक महत्वपूर्ण पद है, जिसपर आसीन वकील किसी भी केस में अदालत को अपनी राय दे सकते हैं।”
“सीनियर वकील अब तक लगभग सवर्ण ही बनते रहे हैं। ऐसी ही सैकड़ों जगहें और हैं जहां SC, ST अभी पहुँचा ही नहीं है। सात दशक बाद हम कह सकते हैं कि हम आगे बढ़े हैं, पर रफ़्तार बहुत धीमी है। बहुत ही सुस्त।”

फूले-अम्बेडकरी आंदोलन के अग्रणी नेतृत्व एवं पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. बी. डी. बोरकर ने अपने सन्देश में लिखा है – “डॉ. के. एस. चौहान (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पीपीआईडी) को 11 दिसम्बर 2021 को सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 71 साल के इतिहास में अनुसूचित जाति से आनेवाले डॉ. के. एस. चौहान पहले अधिवक्ता है जिन्हे सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया गया है।”
आगे बी. डी. बोरकर लिखते हैं, “डॉ. के. एस. चौहान की विधि मामलों की बौद्धिक प्रखरता को उच्चतम न्यायलय के पूर्ण पीठ द्वारा स्वीकार किया गया।
इससे से भी आगे, उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों की सही व्याख्या करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में पिछड़े वर्गों के रिजर्वेशन अर्थात प्रतिनिधित्व के अधिकार के लिए जो सेवाएं दी हैं उसका यह अभिज्ञान है।
मैं उन्हें इस उपलब्धि और प्रतिबद्धता के लिए बधाई देता हूं। हालांकि यह सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के बारे में बहुत कुछ बताता है कि सुप्रीम कोर्ट के 71 साल के इतिहास में कोर्ट को अनुसूचित जाति से कोई सक्षम एडवोकेट ऑन रेकॉर्ड नहीं मिला।”

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट के नाम को निश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन निश्चित की है। सुप्रीम कोर्ट ने 100 अंको की एक व्यवस्था की है। इसमें अधिवक्ता की प्रैक्टिस को देखा जाता है। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलीलें, बहस, प्रकाशित हुए जजमेंट, कानूनी एक्सपर्टनेस आदि कई बातों को देखा जाता है। 100 अंक पाने पर ही किसी अधिवक्ता का नाम सीनियर सीनियर एडवोकेट के रूप में सेलेक्ट करने पर विचार होता है। करीब चार वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस रोहिंगन फाली नरीमन, जस्टिस नवीन सिंन्हा की बेंच ने सीनियर एडवोकेट इंद्रा सिंह की याचिका पर इस व्यवस्था के बारे में फैसला दिया था।

आपको बता दें कि किसी केस में अगर सीनियर एडवोकेट दलील दे रहें है और वे भले ही पिटीशनर की तरफ से नहीं हैं, तो भी सीनियर एडवोकेट को सर्व प्रथम अपनी दलील रखने का मौका कोर्ट देता है।

वैसे तो डॉ. के. एस. चौहान पुरे भारत में पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के संवैधानिक अधिकारों के मामलों के विशेषज्ञ के रूप में प्रख्यात है। आपने कई महत्वपूर्ण मामलों में आर्गुमेंट किये हैं। राजाराम पाल विरुद्ध माननीय लोकसभा स्पीकर अर्थात कैश फॉर क्वेरी केस, एम. नागराज विरुद्ध यूनियन ऑफ इण्डिया इन केस से उनके नाम पर कोंस्टीटूशनल एक्सपर्ट के रूप में मुहर लग गयी।

आपकी महत्वपूर्ण पुस्तक ‘Parliament – Powers, Functions & Privileges’ एक महत्वपूर्ण रिसोर्स बुक के रूप में सामने आयी. इस महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सत्वशिवम ने किया था। इसी वर्ष 2021 में डॉ के एस चौहान की और एक महत्वपूर्ण पुस्तक Citizenship, Rights And Constitutional Limitations का प्रकाशन हुआ। इस पुस्तक का विमोचन भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति मा. हामिद अंसारी द्वारा हुआ। इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के पूर्व न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा ऑनलाइन रूप से व वरिष्ठ पत्रकार प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे।

न्यायिक व संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. के. एस. चौहान इतना महत्वपूर्ण मुकाम हासिल करने के बाद भी डाउन-टू-अर्थ हैं। बहुत ही मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में परिचित डॉ. के. एस. चौहान अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने को लेकर बड़े ही भावुक, गंभीर और अग्रणी हैं। फूले-अम्बेडकरी आंदोलन में अपनी सहभागिता को उन्होंने खुलकर सामने रखा। लोकतान्त्रिक मूल्यों पर अडिग डॉ. के. एस. चौहान का बामसेफ संगठन के साथ गहरा नाता रहा है। वर्तमान में डॉ. के. एस. चौहान पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मूलनिवासी बहुजन (ओबीसी, एससी व एसटी) अधिवक्ताओं को संगठित करने में आपने बड़ी पहल की है। बुद्धिजीवी और आम जनमानस को फूले-अम्बेडकरी विचारधारा के तहत सामान मुद्दों पर संगठित करने के लिए वे भारतभर में भ्रमण करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट बनने पर अनेकों कार्यकर्ता खुश हुए हैं, एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

मूलनिवासी संघ के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य दुष्यंत पाटिल लिखते हैं “विषम परिस्थितियों में उनका चयन जहां संगठन के लोगों को खुशी ले कर आया है, वहीं समाज में चर्चा का केन्द्र भी बन गया है। बहुत ही मिलनसार व्यक्तित्व के धनी चौहान साहब के कार्यालय में समय बिताने का अवसर मिला।”

एमएनटी न्यूज नेटवर्क को डॉ. के. एस. चौहान सर हमेशा मार्गदर्शन करते आ रहें हैं। डॉ के. एस. चौहान सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित होने पर सभी को बहुत सारी बधाइयां।

प्रदीप सुशीला
नेशनल को-ऑर्डिनेटर
एमएनटी न्यूज नेटवर्क

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here