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हम कई बार बेहतर सुविधाओं के अभाव में अपनों को खो बैठते हैं। क्योंकि देश में गुणवत्तापूर्ण इलाज इतनी महंगी हैं की एक गरीब या मिडिल क्लास व्यक्ति चाह कर भी अपना या किसी अपने का इलाज उन महंगे अस्पतालों में नहीं करा सकता। आज इस विश्लेषण में हम दुनिया के टॉप अस्पतालों की लिस्ट देखेंगे। जिसमे भारत का नाम दूर दूर तक नज़र नहीं आयेगा।
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किसी अस्पताल को एक सर्वश्रेष्ठ अस्पताल की सूची में डालने के लिए कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं। जैसे वहा तत्काल इलाज की सुविधा, प्रशिक्षित एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण उपचार, मरीजों तक उनकी पहुंच, अस्पतालों में सभी उपकरणों की उपलब्धता, और साफ सफाई भी महत्वपूर्ण कारकों में एक हैं।
जब भी सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों की बात की जाती है तो अक्सर अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देश बाजी मार जाते हैं। जबकि सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों की सूची में भारत का नाम दूर दूर तक नज़र नहीं आता हैं।
अगर हम दो हजार तेईस में दुनिया के टॉप अस्पतालों की सूची देखे तो उनमें मेयो क्लीनिक का नाम सबसे ऊपर आता हैं जो यूएसए में स्थित हैं । दूसरे और तीसरे नंबर पर क्लीवलैंड क्लिनिक और मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल आता हैं और ये दोनो अस्पताल भी अमेरिका में ही मौजूद हैं।
इसके अलावा कनाडा का टोरंटो जनरल अस्पताल, जर्मनी का चैरीटे – यूनिवर्सिटैट्समिडिन बर्लिन, अमेरिका का जॉन्स हॉपकिन्स अस्पताल आदि का नाम आता हैं।
ये वैसे अस्पताल है जहा दुनिया के किसी भी अस्पतालों से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। तभी तो अक्सर भारत के पैसे वाले लोग बेहतर सुविधा के लिए विदेशों में ही इलाज कराना पसंद करते हैं। क्योंकि उन्हें भली भांति पता होता हैं की भारत में बेहतर इलाज की व्यवस्था कैसी हैं?
भारत में भी कुछ ऐसे अस्पताल हैं जो बेहतर इलाज के लिए जाना जाता हैं। जिनमे दिल्ली का एम्स, मुंबई का टाटा अस्पताल और चेन्नई का अपोलो अस्पताल का नाम आता हैं । लेकिन इन अस्पतालों में एक गरीब या मिडिल क्लास आदमी चाह कर के भी इन अस्पतालों में इलाज नहीं करवा सकता हैं। क्योंकि इन अस्पतालों में इलाज इतनी महंगी होती हैं की, कुछ लोगो की साल भर की कमाई भी उतनी नहीं होती ।
देश के गरीबों के लिए कई सरकारी अस्पताल बनाए गए हैं । जिनकी बद्तर सुविधाओं के चर्चे देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हैं।
उदाहरण के रूरल हेल्थ स्टैटिक्स दो हजार इक्कीस – बाइस की रिपोर्ट का दावा है की, मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में महज पांच प्रतिशत डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभाल रहे हैं, जबकि पंचानवे प्रतिशत डॉक्टरों के पद खाली है।
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच का हाल भी कुछ ठीक नहीं हैं। यहां भी अक्सर मूलभूत सुविधाओं के लिए मरीजों या उनके परिजनों की शिकायते मिलती रही हैं। हाल ही में यह शिकायत आई थी की यहां जांच के लिए परिजनों की लम्बी कतार और मरीजों को स्टेचर तक मुहैया नहीं हो पा रहा है।
यह सिर्फ मध्य प्रदेश और बिहार के सरकारी अस्पतालों का हाल नहीं है बल्कि देश के सभी राज्यों में स्थित सरकारी अस्पतालो का हाल कुछ मिलता जुलता ही हैं। जिसमे लाख शिकायतों के बावजूद हालातो में सुधार होता नहीं दिख रहा हैं। शायद इस लिए क्योंकि यहां इलाज कराने वाले अधिकतर लोगो की पहुंच उन लोगो या संस्थानों तक नहीं हैं। जो इनकी चिंताजनक स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।







