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भारतीय संविधान भारत का सर्वोच्च कानून है। यह एक लिखित दस्तावेज है जो भारत के लोगों के मौलिक सिद्धांतों, अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है। भारतीय संविधान इस देश में छब्बीस जनवरी, उन्नीस सौ पचास को लागू हुआ और यह दुनिया के सबसे विशाल लिखित संविधानों में से एक है।
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भारत का संविधान जो देश के अन्य नागरिकों के साथ साथ उन पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज को भी एक सम्मानजनक और गौरवमय जीवन जीने का अवसर प्रदान करता हैं, जिन्हें हजारों सालो से प्रताड़ित किया गया।
भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संविधान की प्रस्तावना है। जिसे एक प्रकार से पूरे संविधान का सार भी कह सकते हैं, जो संविधान के उद्देश्यों को रेखांकित करता है।
संविधान की प्रस्तावना संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य की बात कहता हैं। साथ ही यह नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, विश्वास की स्वतंत्रता , और और अवसर की समानता की बात कहता हैं। लेकिन अफसोस की मनुवादियों की कूटनीति के कारण हमारा देश इन सब से अब भी बहुत दूर हैं।
मूल रूप से भारत के संविधान के भाग तीन में सात मौलिक अधिकारों को शामिल किया गया था। जिसे बाद में चौवालिसवें संविधान संशोधन द्वारा सम्पति के अधिकार को हटा दिया गया था। अब केवल छः मौलिक अधिकार हैं जिनमे समता का अधिकार (समानता का अधिकार),
स्वतंत्रता का अधिकार,
शोषण के विरुद्ध अधिकार,
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार,
संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार
शामिल हैं।।
भारत के इतिहास में हजारों सालो से देश के मूलनिवासियों की स्थिति चिंताजनक रही। उन्हें मनुवादी व्यवस्था ने सामाजिक , आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक अधिकारी से वंचित रखा । लेकिन भारतीय संविधान में इन्हे मुख्य धारा में लाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
अस्पृश्यता भारतीय इतिहास की एक गंभीर बीमारी रही हैं । जिसका शिकार हजारों वर्षों से इस देश के मूलनिवासियों को होना पड़ा हैं और आज भी हो रहे हैं। जबकि हमारा संविधान अस्पृश्यता के बिल्कुल खिलाफ हैं।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद सतत्रह कहता है कि अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया गया है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास वर्जित है। अस्पृश्यता से उत्पन्न होने वाली किसी भी अक्षमता को लागू करना कानून के अनुसार दंडनीय अपराध होगा।
हम कह सकते है की भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जो मौलिक अधिकारों की गारंटी और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है।
भारतीय संविधान समय की कसौटी पर बिलकुल खरा उतरा है और आज भी भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला बना हुआ है।








