हमारा देश बदल रहा हैं, अब भारत में जातिवाद नही होते हैं, ये सब सुनने में बहुत अच्छा लगता है । लेकिन वास्तविकता का इन सब से कोई लेना देना नही हैं। सच तो यह है की देश में जातिवाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
मूलनिवासी बहुजन समाज के लोगो का खास कर के पढ़े लिखे और थोड़े सफल लोगो का सोच यह रहता है की अब हम छुआछूत से बाहर निकल गए गए हैं, अब हमे या हमारे बच्चों को इन सब चीजों का सामना नही करना पड़ेगा और वे अपने समाज से खुद को अलग थलग रखने लगते हैं।
लेकिन वे लोग नही समझते की जातिवाद उनके साथ उनकी जाति के आधार पर होती हैं न की उनके स्टेटस और पोजिशन को देखते हुए। यहां तो देश के पहले नागरिक और सर्वोच्च्य पद पर आसीन राष्ट्रपति तक को इस बीमारी का शिकार होना पड़ा हैं तो हम और आप क्या चीज हैं?
खैर, जो लोग यह बोलते हैं की अब भारत में जातिवाद नहीं होता। उनके लिए उत्तर प्रदेश के आगरा में घटित घटना एक जीता जागता उदाहरण है, यह बताने के लिए की आज भी इस देश में जातिवाद कैसे फल फूल रहा हैं। जिसका शिकार एक सफल मूलनिवासी से लेकर एक गरीब मूलनिवासी तक को होना पड़ रहा हैं।
घटना बीते चार मई, दो हजार तेईस की हैं। मूलनिवासी युवक – युवती शादी के बंधन में बंधने जा रहे थे। शादी एक बड़े मैरिज हॉल में रखा गया था । जाहिर सी बात है दोनो परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
दूल्हा घोड़ी पर चढ़ कर बारात लेकर वैवाहिक स्थल पर पहुंच रहा था। लेकिन रास्ते पर बीस से पच्चीस लोगो के झुंड ने उन्हें रोक लिया और दूल्हे को घोड़ी से उतरने के लिए मजबूर करने लगे। जिसके बाद दोनो पक्षों के बीच झड़प हुई।
इस मामले को लेकर दूल्हे की सास ने पच्चीस लोगो के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया कराया हैं।
अपनी शिकायत में दूल्हे की सास गीता देवी ने बताया की, जब उनकी बेटी की बारात सोहल्ला बस्ती से गुजर रही थी, तो उच्च जाति के बीस से पच्चीस लोगों ने लाठी और लोहे की छड़ से लैस होकर उसके दामाद को घोड़ी से नीचे उतरने के लिए मजबूर किया और उन्हें तथा अन्य लोगों की पिटाई की।
की गई शिकायत के अनुसार आरोपियों का कहना था की, ‘हमारे गांव में दलित दूल्हे घोड़ी पर सवार होकर अपनी शादी में नहीं जाते, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?’
जरा सोचिए आज हम इक्कीसवीं सदी में हैं, हमारे पास संविधान हैं, एससी एसटी एक्ट हैं फिर भी यह हाल हैं। यह सब जब नही था तब स्थिति कितनी भयावह होगी ? आप अंदाजा लगा सकते हैं।







