पुनः लेट्रल एंट्री से 30 पदों पर यूपीएससी करेगी भर्ती

यूपीएससी के अभ्यर्थियों द्वारा हो रहा है विरोध

यूपीएससी परीक्षाओं द्वारा चयनित अधिकारियों में खलबली

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देश के ब्यूरोक्रेसी में आईएएस, आईपीएस आईआरएस आदि की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा परीक्षा होती है। इसकी प्रक्रिया भी लम्बी होती है। अभ्यर्थी सालों कड़ी मेहनत करते हैं। लाखों उच्चशिक्षित युवां परीक्षा देतें है उसमें से कुछ सौ ही परीक्षा में पास होकर सेलेक्ट हो जाते हैं। इसमें एससी एसटी ओबीसी और माइनॉरिटी के अभ्यर्थी अपने वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

लेकिन आपको अब यह जानकार हैरानी होगी की यूपीएससी ने खोज करके केंद्र सरकार के सचिवालय में ज्वॉइंट सेक्रेटरी (संयुक्त सचिव) स्तर के पदों पर सीधे भर्ती के लिए दूसरा ही रास्ता निकला है। इस भर्ती से प्राइवेट सेक्टर के लोगों को सीधे नियुक्त किया जाएगा। इस प्रक्रिया का नाम है लेट्रल एंट्री।

दरअसल यह बता दें कि यूपीएससी के माध्यम से सरकार की इस नीति पर पिछले वर्ष ही काफी टिका हुयी थी। लेकिन दबाव नहीं बन पाया। इस बार भी यूपीएससी फिर केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 30 पदों की भर्ती लैटरल तरीके से करने जा रही है। इन 30 में 3 ज्वांइट सेक्रेटरी (संयुक्त सचिव) और 27 डाइरेक्टर स्तर के पदों के लिए आवेदन मंगाएं गए है। इनको लाखों का पगार भी दिया जाएगा। मुख्य बात यह है कि इस भर्ती के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारी आवेदन नहीं कर सकते।

आपको बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग अर्थात यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, वन सेवा परीक्षा या अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए हर साल परीक्षा का आयोजन किया जाता है। परीक्षा में विभिन्न प्रक्रिया से गुजर गर चयनित अधिकारी अपने सरकारी करियर में लंबा अनुभव हासिल करने के बाद ही ज्वॉइंट सेक्रेटरी के पद पर पहुंचते है।

लेकिन अब इसके हटकर अब सीधे लेट्रल एंट्री से प्राइवेट सेक्टर के प्रोफेशनल्स भर्ती होंगे। इसमें ज्वॉइंट सेक्रेटरी व डायरेक्टर (ग्रुप ए) के पद हैं। सरकार की इस निति से न केवल यूपीएससी अभ्यर्थी बल्कि यूपीएससी की परीक्षा से चयनीत अनेकों अधिकारीयों और उनके कर्मचारी संगठनों में खलबली मची है।

आपको बता दें कि वर्त्तमान सरकार की निजीकरण की निति को लेकर पुरे देश भर में विरोध हो रहा है। बजट में भी निजीकरण की निति का खुला समर्थन किया गया है। इसी के बिच अब पुनः एक बार लैटरल एंट्री से केंद्रीय मंत्रालय के विभिन्न विभागों में उच्च अधिकारी पद पर निजी क्षेत्र के लोगों को बिठाना इसके पीछे क्या उद्देश्य है? यह सवाल उठाया जा रहा है।

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