मजदूरों किसानों के मसीहा: बाबासाहेब आंबेडकर


1मई – मजदूर दिवस पर विशेष

1.श्रम मंत्री की हैसियत से फैक्ट्रियों में मजदूरों के 12 से 14 घंटे काम करने के नियम को बदल कर 8 घंटे किया गया।

  1. 2.बाबासाहेब ने ही महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ जैसे कानून बनाने की पहल की थी। और महिलाओं को मेटरनिटी अवकाश की सुविधा लागू हुई.
  2. 3.बाबासाहेब ने 1936 में श्रमिक वर्ग के अधिकार और उत्थान हेतु ‘इंडिपेन्डेंट लेबर पार्टी’ की स्थापना की। इस पार्टी का घोषणा पत्र मजदूरों , किसानों , अनुसूचित जातियों और निम्न मध्य वर्ग के अधिकारों की हिमायत करने वाला घोषणापत्र था।
  3. 4.बाबासाहेब ने 1946 में लेबर मिनिस्टर की हैसियत से केंन्द्रीय असेम्बली में न्यूनतम मजदूरी निर्धारण सम्बन्धी एक बिल पेश किया जो 1948 में जाकर ‘न्यूनतम मजदूरी कानून’ बना ।
  4. 5.बाबासाहेब ने ‘ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट’ में सशोधन करके सभी यूनियनों को मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया । 1946 में उन्होंने लेबर ब्यूरो की स्थापना भी की।
  5. 6.बाबासाहेब पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मजदूरों के हड़ताल करने के अधिकार को स्वतंत्रता का अधिकार माना और कहा कि मजदूरों को हड़ताल का अधिकार नहीं देने का अर्थ है मजदूरों से उनकी इच्छा के विरुद्ध काम लेना और उन्हें गुलाम बना देना । 1938 में जब बम्बई प्रांत की सरकार मजदूरों के हड़ताल के अधिकार के विरूद्ध ट्रेड डिस्प्यूट बिल पास करना चाह रही थी तब बाबा साहेब ने खुलकर इसका विरोध किया।
  6. 7.बाबासाहेब ट्रेड यूनियन के प्रबल समर्थक थे। वह भारत में ट्रेड यूनियन को बेहद जरूरी मानते थे। वह मानते थे कि भारत में ट्रेड यूनियन अपना मुख्य उद्देश्य खो चुका है। उनके अनुसार जब तक ट्रेड यूनियन सरकार पर कब्जा करने को अपना लक्ष्य नहीं बनाती तब तक वह मज़दूरों का भला कर पाने में अक्षम रहेंगी और नेताओं की झगड़ेबाजी का अड्डा बनी रहेंगी।
  7. 8.बाबासाहेब का मानना था कि भारत में मजदूरों के दो बड़े दुश्मन हैं – पहला मानवीय अधिकारों के विरुद्ध विचारधारा भेदभाव की कुव्यवस्था और दूसरा पूंजीवाद। देश के श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए दोनों का खात्मा जरूरी है।
  8. 9.बाबासाहेब का मानना था कि वर्णव्यवस्था न सिर्फ श्रम का विभाजन करती है बल्कि श्रमिकों का भी विभाजन करती है। वह श्रमिकों की एकजुटता और उनके उत्थान के लिए इस व्यवस्था का खात्मा जरूरी मानते थे।
  9. 10.बाबासाहेब भारत में सफाई कामगारों के संगठित आंदोलन के जनक भी थे। उन्होंने बम्बई और दिल्ली में सफाई कर्मचारियों के कई संगठन स्थापित किए। बम्बई म्युनिसिपल कामगार यूनियन की स्थापना बाबासाहेब ने ही की थी।
  10. प्रस्तुति: डॉ एम एल परिहार जयपुर

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