आठ वर्षीय इंद्र मेघवाल की मौत से आज सारा देश दुःखी हैं। मासुम बच्चे की मौत तो हो गयी लेकिन लगता है कि व्यवस्था से जुड़े लोग दोषी को बचाने में ही जुटें हैं। एकतरफ बच्चे के परिवार को बदनाम करने कि कोशिश हो रही है दूसरी तरफ राजस्थान सरकार ने मृतक बच्चे के परिवार को कॉमपेन्सेशन के रूप में मुख्यमंत्री सहायता कोष से पाँच लाख रुपये देने कि घोषणा की है। इस पर सीएम का जगह-जगह से विरोध हो रहा है। क्योंकि जबकि कन्हैयालाल हत्याकांड के मामले में सरकारी नौकरी के साथ पचास लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था। आरोप हैं क्या राजस्थान सरकार जाति देखकर सहायता करते हैं?
राजस्थान के जालौर जिले में स्थित सुराणा गांव का मामला भारत के जातिआधारित अत्याचार कि हजारों घटनाओं में से एक एक ताजा उदाहरण हैं। इस मामले को जहाँ प्रशासन जल्द से जल्द रफा-दफा करने में तुला हैं वहीं राजस्थान सरकार की उदासीन व जातिवादी मानसिकता का परिचय हो रहा है।
बताते चलें कि बीते रविवार न्याय की मांग कर रहे मृतक के परिवार और पूरे ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। इससे मृतक बच्चे के मामा सहित एक दर्जन लोग घायल हो गए। करीब एक घंटे तक चली लाठी चार्ज के बाद पुलिस ने तीस से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। मृतक बच्चे के शव का जबरन अंतिम संस्कार करने की आशंका जताई जा रही थी।
न्याय की मांग कर रहे लोगो का आरोप है कि, जालौर जिला व पुलिस प्रशासन पीड़ितों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसके लिए हम जिला कलक्टरी परिसर में प्रदर्शन करना चाहते थे, जिसको रोकने के लिए प्रशासन की सह पर ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया गया। जिला प्रशासन बच्चे के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बना रहा था। आशंका यह भी जताई जा रही थी कि कही रात के अंधेरे में पुलिस यूपी के हाथरस कांड की तरह शव जला न दे।
बताते चलें कि गहलोत सरकार ने मृतक के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से पांच लाख रूपये मुआवजे के रूप में देने का ऐलान किया है। जबकि उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड पर सरकार ने सरकारी नौकरी के साथ पचास लाख रुपये का मुआवजा दिया था। लोगो का आरोप हैं कि सरकार जाति देखकर सहायता देते हैं।
सरकार के सामने मांग रखी गयी है कि मृतक बच्चे के परिवार को मुआवजे के रूप में पचास लाख रुपये, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, दोषियों पर कड़ी कारवाई और प्रदर्शन कर रहे लोगो पर लाठियां बरसाने वाले पुलिसवालों को बर्खास्त करने समेत केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में देने की मांग रखी हैं। इन मांगों पर पुलिस और प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही और उसके बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया गया।
आजादी के 75वीं वर्ष के वर्षगांठ पर बालक के न्याय के लिए पूरे देश में जगह जगह प्रदर्शन हुए। दिल्ली के जेएनयू में बापसा से जुड़े विद्यार्थियों ने अपना विरोध जताया।






