भारत के रणजीतसिंह डिसले इनको इस साल का ग्लोबल टीचर अवार्ड मिला है। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय है। उनको यह अवार्ड लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के एवं QR कोड वाली पाठ्यपुस्तकों की क्रांति लाने की अहम भूमिका के लिए मिला है।
यूनेस्को और लंदन के वार्की फाउंडेशन की ओर से यह पुरस्कार हर साल दिया जाता है। इस पुरस्कार की किम्मत 1 मिलियन अमेरिकन डॉलर्स याने 7 करोड़ रुपए है। हालांकि डिसले ने अवॉर्ड की राशी का 50 फीसदी हिस्सा मतलब 10 लाख डॉलर का आधा बाकी 9 उप-विजेताओं के साथ बांटने का फैसला किया है।
रणजितसिंह डिसले सोलपुर जिले के पारितेवाडी गांव में ज़िला परिषद स्कूल में प्राथमिक शिक्षक है। डिसले इटली, ब्राझिल, व्हिएतनाम, मलेशिया, नायजेरिया, दक्षिण आफ्रिका, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूके के साथ शिक्षकों के टॉप 10 में थे।
अवार्ड जीतने पर डिसले ने कहा “टीचर बदलाव लाने वाले लोगों में से होते हैं जो चॉक और चुनौतियों को मिलाकर अपने स्टूडेंट की जिंदगी बदलते हैं। इसलिए मैं यह कहते हुए हुए खुश हूं कि मैं अवॉर्ड राशि का आधा हिस्सा अपने साथी प्रतिभागियों को दूंगा। मेरा मानना है कि साथ मिलकर हम दुनिया को बदल सकते हैं क्योंकि साझा करने की चीज बढ़ रही हैं।







