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पचास फीसदी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम का अभाव।
मात्र 24 फीसदी सरकारी स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा।
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यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफॉरमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) की 2021-22 की रिपोर्ट बताती हैं कि भारत में मात्र 24 फीसदी सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा हैं। जबकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल आदि ऐसे राज्य हैं। जहा के मात्र 15 फीसदी स्कूलों में यह सुविधा हैं।
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अभी की परिस्थिति को देखते हुए । डिजिटल स्टडी कितनी महत्वपूर्ण हैं यह हम सभी जानते हैं। करोना काल में अन्य चीजों के साथ साथ पढ़ाई भी ऑनलाइन हो गयी थी।
खास कर स्कूली पढ़ाई तो पूर्ण रूप से ऑनलाइन माध्यम पर निर्भर हो चुकी थी। लेकिन ऑनलाइन माध्यम से दि जाने वाली शिक्षा सभी बच्चों तक समान रूप से नहीं पहुंची। जिसके पीछे अनेकों कारण रहें। जैसे स्मार्ट फ़ोन का न होना, इंटरनेट सुविधा का अभाव आदि।
आज भले ही सारे स्कूल खुल चुके हो । लेकिन डिजिटल स्टडी से बच्चो को अवगत कराना सरकारों की जिम्मेदारी बन गयी हैं। और यह बात केंद्र के साथ-साथ विभिन्न राज्यो की सरकारें भी बिल्कुल अच्छी तरह समझती हैं। इसलिए तो स्कूलों में इंटरनेट सेवा के साथ साथ स्मार्ट क्लासरूम पर जोर दे रही हैं।
लेकिन आश्चर्य की बात तो यह हैं की अभी भारत के छियासठ फीसदी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम तो दूर वहाँ इंटरनेट सेवाएं तक नहीं पहुंची हैं।
इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली संस्था यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफॉरमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) का दावा है कि आज भी भारत के छियासी फीसदी स्कूलों में इंटरनेट सेवा नहीं हैं। यह दावा यूडीआईएसई प्लस ने अपनी 2021-22 की रिपोर्ट में की हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत मे कुछ राज्य तो ऐसे भी हैं जहाँ के पचासी फीसदी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा नहीं हैं। उन राज्यो में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, मेघालय, ओडिशा, तेलंगाना और त्रिपुरा शामिल हैं। जहाँ 80 से 85 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
भारत के जिन स्कूलों में इंटरनेट सुविधाएं हैं, उनमें से अधिकतर स्कूल निजी स्कूल हैं। जबकि सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब हैं। आंकड़े बताती है कि जहा साठ फीसदी निजी स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा हैं । वही सिर्फ चौबीस फीसदी सरकारी स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा हैं।
बताते चले कि, सर्वेक्षण में शामिल 50 प्रतिशत से भी कम स्कूलों में काम करने वाले कंप्यूटर उपलब्ध हैं। वही रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता भी कम है। देश के कुल चौदह लाख स्कूलों में से केवल 2,22,155 स्कूलों में काम करने वाले स्मार्ट क्लासरूम हैं, जिनमें शिक्षण के लिए डिजिटल या स्मार्ट बोर्ड का उपयोग किया जाता है।







