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केंद्र सरकार द्वारा भारतीय न्याय संहिता में लाए गए नए हिट एंड रन क़ानून के ख़िलाफ़ ड्राइवरों की देशव्यापी हड़ताल बीते सोमवार से जारी हैं। इसे काला कानून बताते हुए इसके ख़िलाफ़ देशभर के ट्रांसपोर्टर और ड्राइवर हड़ताल पर चले गए हैं। इसके चलते विभिन्न राज्यों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
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केंद्र सरकार द्वारा भारतीय न्याय संहिता के तहत लाए गए हिट-एंड-रन कानून के विरोध में देशभर के सैकड़ों वाहन चालकों ने अपनी गाडियां सड़को पर नहीं निकाली हैं।
बताते चले की, भारतीय न्याय संहिता के तहत हिट-एंड-रन कानून के मामलों के लिए सात लाख जुर्माना और दस साल की जेल की सजा के नए प्रावधान हैं। जिसका विरोध करते हुए ट्रक, टैक्सी और बस ऑपरेटरों ने देशव्यापी हड़ताल किया और केंद्र सरकार से इसे लागू नहीं करने की मांग की हैं, क्योंकि इससे उनका अनुचित उत्पीड़न हो सकता है।
बताते चले की, नए कानून में हिट एंड रन के केस में गलत ड्राइविंग या लापरवाही के चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और ड्राइवर बिना पुलिस को सूचना दिए मौके से फरार हो जाता है, तो उसे दस साल तक की सजा और सात लाख रूपये तक का जुर्माना लग सकता है।
इस नए कानून के विरोध में ड्राइवरों ने बीते सोमवार से तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल किया हैं। उनका कहना हैं की अगर जल्द ही सरकार इन कानून को वापिस नहीं लेती हैं तो वे लंबे समय तक इस आंदोलन को चलाने में मजबूर होंगे।
रिपोर्ट्स की माने तो बीते सोमवार से शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल से आने वाले दिनों में ईंधन स्टेशनों पर पेट्रोल और डीजल के वितरण और फल तथा सब्जी की आपूर्ति पर असर पड़ने की संभावना है।
बताते चले की इस नए प्रावधान के विरोध में बीते सोमवार यानी एक जनवरी, दो हजार चौबीस से देशभर की सड़को में गाडियां नजर नहीं आई।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और बिहार के स्थानीय परिवहन संघों के अनुसार, प्रावधान के विरोध में सोमवार को निजी बसें, ट्रक, तेल टैंकर और टैक्सियां सड़कों पर नहीं उतरी ।
देश भर के लगभग अधिकांश राज्यों में इस हड़ताल का असर रहा लेकिन इसका असर सबसे अधिक पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, और हरियाणा जैसे राज्यों में दिखा।
खास कर पंजाब के विभिन्न स्थानों, मध्य प्रदेश के इंदौर, गुजरात के सूरत और हरियाणा के अंबाला से ड्राइवरों के विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं है।
ड्राइवरों की इस देशव्यापी हड़ताल के चलते कई जगहों में ईंधन की उपलब्धता में कमी देखी गई है क्योंकि तेल टैंकर चालक भी हड़ताल पर हैं। जिस वजह से अन्य राज्यो में भी ईंधन की उपलब्धता में कमी की सूचना है।
ड्राइवर एसोसिएशन के नेताओं का कहना हैं की, यह एक काला कानून है, और ड्राइवर सात लाख रुपये का जुर्माना नहीं दे सकता। हम कानून में संशोधन होने तक सेवाएं फिर से शुरू नहीं करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना हैं की, अगर हड़ताल एक और दिन जारी रहा तो ईंधन की कमी हो जाएगी। जबकि अगले कुछ दिनों में सब्जियों, फलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होगी।








