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हाल ही में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक – दो हजार तेईस में भारत ग्यारह स्थान फिसल कर एक सौ अस्सी देशो की सूची में एक सौ एकसठवें पायदान पर पहुंच चुका हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सिर्फ आठ देशो को छोड़ कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में पूरी दुनिया में सबसे खराब स्थिति में हैं।
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आज भारतीय मीडिया में वो बात नहीं रहीं जो वाकई किसी लोकतांत्रिक देश की मीडिया में होनी चाहिए। आज के न्यूज़ चैनल देश की प्रमुख समस्याओं को छोड़ कर किसी विशेष पार्टी की प्रवक्ता के रूप में कार्य करती दिखाई देती हैं।
लेकिन देश में आज भी कुछ ऐसे पत्रकार या चैनल हैं जो एक ईमानदार मीडिया होने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। लेकिन आज इनकी सुरक्षा की कोई गरंटी नहीं हैं। यह हम नहीं बल्कि हाल ही में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक बता रही हैं, की कैसे ? भारत पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में दुनियां में सबसे खराब स्थिति में हैं।
बताते चलें कि बीते तीन मई, दो हजार तेईस दिन बुधवार को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक दो हजार तेईस में भारत का स्थान एक सौ इकसठवाँ रखा गया हैं। इस रिपोर्ट में भारत पिछले साल के मुक़ाबले ग्यारह स्थान पिछड़ा हैं।
पिछले साल इस रिपोर्ट में भारत का स्थान एक सौ अस्सी देशो की सूची में एक सौ पचासवाँ था। जबकि इस साल यानी दो हजार तेईस में भारत एक सौ अस्सी देशो की सूची में ग्यारह स्थान पिछड़ कर एक सौ ईकसठवें पायदान पर पहुँच गया हैं।
रिपोर्ट में भारत उन इकतीस देशों में शामिल है, जहाँ रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का मानना है कि इन देशों में पत्रकारों के लिए स्थिति ‘बहुत गंभीर’ है।
बताते चलें कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में पांच बिंदु शामिल होते हैं, जिनमें अंकों की गणना की जाती है और फिर देशों को रैंक दी जाती है। ये पांच बिंदु राजनीतिक संकेतक, आर्थिक संकेतक, विधायी संकेतक, सामाजिक संकेतक और सुरक्षा संकेतक होते हैं, जिसमे भारत की स्थिति बेहद खराब हैं।
रिपोर्ट में भारत के लिए सबसे चिंताजनक गिरावट सुरक्षा संकेतक श्रेणी में है, जहां भारत की रैंक एक सौ अस्सी देशो की सूची में एक सौ बहत्तर है।
इस बात को सीधे सीधे समझे तो इस पैरामीटर पर एक सौ अस्सी देशो में से केवल आठ देशों की रैंक भारत से खराब है। जिनमे चीन, मेक्सिको, ईरान, पाकिस्तान, सीरिया, यमन, यूक्रेन और म्यांमार शामिल हैं। जबकि यह कह सकते है कि भारत पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में एक सौ इकहत्तर देशो में सबसे खराब है।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, भारत मीडिया के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है। यहाँ हर साल औसतन तीन या चार पत्रकार अपने काम के सिलसिले में जान गंवा देते हैं।
सूचकांक में भारत के संदर्भ में कहा कि, कानूनी रूप से सत्ता में बैठे लोगों द्वारा पत्रकारों को कई तरह से परेशान किया जाता है- जिसमें राजद्रोह और आपराधिक मानहानि के आरोप शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘भारतीय कानून सैद्धांतिक रूप से सुरक्षात्मक है लेकिन सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों के खिलाफ मानहानि, राजद्रोह, अदालत की अवमानना और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप बढ़ रहे हैं। उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी’ होने का ठप्पा लगाया जाता है।








