खराब सड़क से कारण मूलनिवासी महिला की गई जान।

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मामला पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले के एक गांव की हैं। जहा की सड़के इतनी खराब हैं की मृतक के पति द्वारा बुलाने पर भी कोई एंबुलेंस या निजी वाहन नहीं पहुंचा। मजबूरी में महिला को एक खाट पर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते पर ही महिला ने दम तोड़ दिया।

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कहने को तो हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं और हमारा देश विकासशील देशों की सूची में आता हैं, लेकिन ऐसी खबरे सुन कर रूह कांप जाती हैं और मन ही मन एक सवाल उठता हैं की क्या सच में हम एक विकासशील देश हैं?

क्योंकि इस देश में कुछ गांव ऐसे भी हैं जिनकी सड़के इतनी खराब हैं की वहा एंबुलेंस या कोई वाहन चालक आना नहीं चाहता और यही कारण है की आज तक कितनो ने अपनी जान गवांई हैं।

ऐसा ही मामला एक बार फिर पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के बामनगोला ब्लॉक के मालडांगा गांव में हुई हैं।

खबरों के मुताबिक, बीते सत्रह नवंबर, दो हजार तेईस दिन शुक्रवार को एक बीमार महिला को चारपाई पर लिटाकर उनके परिजन अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उस महिला ने दम तोड़ दिया।

उनके पति कार्तिक रॉय ने बताया कि, उन्होंने एंबुलेंस सेवा प्रदाताओं के अलावा अन्य वाहन संचालकों से पत्नी को अस्पताल पहुंचाने का अनुरोध किया था, लेकिन सड़कों की खराब स्थिति के कारण कोई भी आने को तैयार नहीं हुआ।

जिसके बाद उनके परिजन उन्हें चारपाई पर लिटाकर अस्पताल ले जाने का मजबूर हुए, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

चारपाई पर लेटी हुई महिला को दो लोगों द्वारा कीचड़ भरे रास्ते पर ले जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

मिली जानकारी के मुताबिक गांव से सरकारी अस्पताल की दूरी लगभग दस किलोमीटर हैं। जिसमे से पांच किलोमीटर तक कच्ची सड़क हैं।

चौबीस वर्षीय मृतक ममोनी रॉय के परिजनों ने कहा कि उन्हें बीते बुधवार (15 नवंबर) से बुखार था। जैसे ही उनकी हालत बिगड़ी, उनके पति कार्तिक रॉय ने उन्हें नजदीकी सरकारी ग्रामीण अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने की कोशिश की।

यहां तक की उन्होंने एक निजी एंबुलेंस, कार और एक टोटो यानी ई-रिक्शा चालक को भी फोन किया था । लेकिन जब वाहन चालकों को पता चला की मालदंगा गांव जाना है तो सभी ने आने से मना कर दिया।

ममोनी रॉय के पति कार्तिक ने कहा की, जब वाहन चालकों ने आने से मना कर दिया तो मुझे अपनी पत्नी को चारपाई पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जब हम अस्पताल पहुंचे तो वह मर चुकी थी। अगर गांव में सड़क ठीक होती तो मेरी पत्नी जीवित होती।

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