मध्य प्रदेश के श्रमिकों की दिहाड़ी ढाई सौ रुपए से भी कम।

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हाल ही में जारी आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पुरुष कृषि श्रमिकों की दिहाड़ी देश में सबसे कम हैं। प्रदेश में ग्रामीण श्रमिकों को मात्र दो सौ उनतीस रुपए (₹229.2) की दिहाड़ी मिलती हैं। जो राष्ट्रीय औसत आय से काफी कम हैं।

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मार्च, दो हजार तेईस में राष्ट्रीय औसत तीन सौ पैंतालीस (345.7) रुपये बताई गई थीं। लेकिन मध्य प्रदेश, गुजरात और त्रिपुरा ऐसे राज्य है, जहा श्रमिकों की दैनिक मजदूरी तीन सौ रुपए से कम हैं।

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से संकलित आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पुरुष कृषि श्रमिकों की दैनिक मजदूरी सिर्फ़ दो सौ उनतीस (229.2) रुपये हैं।

जबकि मार्च, दो हजार तेईस को समाप्त वर्ष के लिए राष्ट्रीय औसत तीन सौ पैंतालीस (345.7) रुपये था। मतलब मध्य प्रदेश में श्रमिकों की मजदूरी राष्ट्रीय औसत से एक सौ सौलह (116) रुपए कम हैं।

मध्य प्रदेश के बाद गुजरात सबसे कम दिहाड़ी मजदूरी वाला प्रदेश हैं जहां ऐसे श्रमिकों को मात्र दो सौ इकतालीस दशमलव नौ (241.9) रुपये की दैनिक मज़दूरी मिलती है।

मतलब राष्ट्रीय औसत से लगभग एक सौ चार रुपए कम दिहाड़ी गुजरात के ग्रामीण इलाकों में पुरुष कृषि श्रमिकों को मिलती हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में एक ग्रामीण कृषि श्रमिक अगर पच्चीस दिन काम करता है तो उसकी प्रति माह लगभग पांच हजार सात सौ तीस (5,730) रुपये की मासिक आय होगी। वही गुजरात में एक खेतिहार मजदूर की मासिक आय लगभग छह हजार सैंतालीस (6,047) रुपये रही होगी।

कम भुगतान करने वाले अन्य राज्यों की बात करे तो उनमें उत्तर प्रदेश, ओडिशा और औद्योगिक राज्य कहे जाने वाला राज्य महाराष्ट्र शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण कृषि श्रमिकों को वर्ष दो हजार इक्कीस – बाइस (2021-22) में औसत दैनिक वेतन तीन सौ नौ रुपए थी। जबकि इसी बीच ओडिशा के ग्रामीण कृषि श्रमिकों की दैनिक मजदूरी दो सौ पचासी रुपए थी।

जबकि औद्योगिक राज्य कहे जाने वाले महाराष्ट्र में पुरुष कृषि श्रमिकों को वित्तीय वर्ष दो हजार इक्कीस – बाइस में प्रतिदिन तीन सौ तीन रुपये मिले हैं।

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