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हाल ही में झारखंड में पंचायत वाइस अबुआ आवास योजना दो हजार तेईस – चौबीस की सूची जारी की गई हैं। जिसमे ऐसे कई सामान्य वर्गो से आने वाले लोगो का नाम देखा जा सकता हैं जिनका समुदाय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़ा वर्ग दर्शाया गया हैं।
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दो हजार ग्यारह में हुए जनगणना के मुताबिक पूरे देश में लगभग सत्रह लाख तिहत्तर हजार (17.73 लाख) लोग ऐसे थे जिनके पास सिर छुपाने के लिए छत नहीं हैं।
अन्य राज्यों की तरह ही झारखंड में भी ऐसे लोगो की संख्या हजारों में थी। जिनके पास अपना कोई घर नहीं हैं।
दो हजार ग्यारह की जनसंख्या के मुताबिक झारखंड में प्रति लाख आबादी पर इकहत्तर (71) लोगो के पास घर नहीं था। जबकि पूरे राज्य में तेईस हजार तीन सौ इक्यांवे (23,391) लोगों के पास घर नहीं था।
अन्य राज्यों की तरह झारखंड में भी ऐसे लोगों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गो की आबादी सबसे अधिक हैं।
आरोप यह भी लगाया जा रहा हैं की विभिन्न योजनाओं के तहत मिल रहे आवास को एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के नाम पर सामान्य वर्गो को दिया जा रहा हैं। जिनके पास न ही घर की कमी हैं, न ही जमीनों की और न ही वे लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
हाल ही में झारखंड में पंचायत वाइस अबुवा आवास योजना दो हजार तेईस-चौबीस की सूची जारी की गई हैं। जिसमे ऐसे कई सामान्य वर्गो से आने वाले लोगो का नाम देखा जा सकता हैं जिनका समुदाय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़ा वर्ग दर्शाया गया हैं।
सूची में जारी नामों में एक नाम बिंदेश्वर पांडे का हैं। जिसमे परिवार के मुख्या का नाम धीरन चंद्र पांडे हैं। जिसको अनुसूचित जाति (एससी) की कैटेगरी में रखा गया हैं। वही एक नाम राम रतन पांडे हैं, जिसमे परिवार के मुख्य का नाम माया देवी हैं। जिसको ओबीसी कैटेगरी में रखा गया हैं।
वही इस सूची में एक नाम धनेश्वर पांडे हैं, जिसमे परिवार के मुख्या का नाम दीपू देवी हैं। इसे भी ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग में रखा गया हैं।
इसी तरह इस सूची में ऐसे कई नाम शामिल हैं,जिन्हें एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय में रख कर अबूवा आवास योजना का लाभ दिया जा रहा हैं।
धनबाद जिला के तोपचांची प्रखंड के ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत में जरूरतमंद को आवास योजना का लाभ न देकर कुछ ऐसे लोगों को इसका लाभ दिया जा रहा है जिसके पहले से ही दो तल्ला मकान, चार चक्का वाहन हैं और इसके अलावा वे पंचायत के प्रतिनिधि भी है।








