तामिलनाडु राज्य ने हाल ही में एक विधेयक पारित किया जिसके तहत तमिलनाडु राज्य सरकार को अपने राज्य में विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति का अधिकार होगा।
इसके पहले कुलपति की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास होता था लेकिन राज्यपाल राज्य के साथ इसके लिए सलाहमशविरा करते थे। लेकिन तमिलनाडु राज्य के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा बंद हो गई। उन्होंने ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को कुलपतियों का चयन करने का अधिकार नहीं होने के कारण उच्च शिक्षा पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ता है। अगर शीर्ष शिक्षाविद को चुनने का प्राधिकार राज्यपाल के पास रहता है तो कार्यों और शक्तियों का टकराव होगा।
आपको बता दें की प्रारंभ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस विधेयक का विरोध किया तो मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सदन को बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह-राज्य गुजरात में भी कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल नहीं करते, राज्य सरकार करती है। तेलंगाना और कर्नाटक समेत कई अन्य राज्यों में भी ऐसा ही है। आपको बता दें की पिछले वर्ष महाराष्ट्र सरकार ने भी कुछ ऐसा ही कदम उठाया है।
तमिलनाडु मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि यह मुद्दा राज्य के अधिकारों का है तथा राज्य की विश्वविद्यालयी शिक्षा और लोगों द्वारा चुनी गई सरकार से संबंधित है।
आपको बता दें देश के कई राज्य ऐसे हैं जिनमें केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा को विरोधी दल की भूमिका निभानी पड़ती है। कई राज्य अपने अधिकारों को लेकर खुलकर सामने आ रहे हैं। आपको बता दें की नई शिक्षा नीति के तहत भी कई राज्या अपने अधिकारों को लेकर गंभीर है।








