क्या अब बामसेफ के एजेंडों पर राजनीति करेंगी कांग्रेस?

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बामसेफ ने हमेशा से ही इस देश के मूलनिवासियों जिसमे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हैं की आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग की हैं। लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही इस मांग को नजर अंदाज किया हैं। जबकि वर्तमान में इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस राजनीति करती हुई दिख रही हैं।

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आरएसएस जैसी मूलनिवासी विरोधी संघ ने कांग्रेस और बीजेपी के नाम पर देश के मूलनिवासियों का खूब शोषण किया ।

आजादी के बाद के साठ साल कांग्रेस और दो हजार चौदह से बीजेपी के नाम पर देश के एससी, एसटी, ओबीसी और कन्वर्टेड माइनोरिटीज का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप से खूब शोषण किया।

पिछले नौ सालो से बीजेपी सत्ता पर हैं। बीजेपी के कार्य में आम जनों की हालत बद से बदतर हो गई हैं। देश में बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर हैं। जिससे लोगो का हाल बेहद बुरा हैं और लोगो का भरोसा अब भाजपा से लगभग उठ चुका हैं।

बीजेपी के बाद विकल्प के रूप में कांग्रेस को फिर से तैयार करने का इरादा देश की राजनीति में साफ साफ दिखाई पड़ रहा हैं।

संघ वालो ने कांग्रेस को फिर से तैयार करने के लिए कांग्रेस को बहुजन हितैषी के रूप में खड़ा कर रही हैं। जिससे देश के बहुसंख्यक मूलनिवासियों को सतर्क रहने की आवश्यकता हैं।

आजादी के बाद हुए जनगणना में भले ही कभी ओबीसी की आबादी देश के सामने सार्वजनिक नहीं की गई । लेकिन बामसेफ हमेशा यह दावा करती आई है की इस देश में एससी, एसटी, ओबीसी और कन्वर्टेड माइनोरिटीज की आबादी देश की कुल आबादी का पचासी फीसदी हैं।

साथ ही बामसेफ ने हमेशा से ही संख्या के आधार पर हिस्सेदारी की बात की हैं। लेकिन साठ साल सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने हमेशा बामसेफ की इस मांग को नजर अंदाज किया हैं।

जबकि अब कांग्रेस राजनीतिक लाभ पाने के लिए खुद बामसेफ के एजेंडो के सहारे राजनीति करती दिख रही हैं।

कांग्रेस के नेता एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों की बात कर रही हैं। कांग्रेस का कहना है की, ओबीसी को उसके आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी मिले, जबकि कांग्रेस के पूरे इतिहास में ऐसे शब्द किसी कांग्रेसी नेता के मुंह से नही निकली थी।

यहां तक की आज तक कांग्रेस ने किसी ओबीसी या एससी, एसटी को प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया।

कांग्रेस के जितने भी नेता प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बने हैं उनमें से सब गैर मूलनिवासी ही रहे हैं।

कांग्रेस यह भली भांति समझती हैं की, बामसेफ क्या चीज़ हैं और इसके सामाजिक कार्य से समाज में कितना बड़ा प्रभाव पड़ता हैं।

आजादी के बाद इस देश में भले ही एससी, एसटी और ओबीसी की संख्या नही बताई गईं हैं। लेकिन बामसेफ ने देश के मूलनिवासियों को यह भलीभांति समझा दिया हैं की इस देश में मूलनिवासियों की स्थिति क्या है? और मूलनिवासियों की हिस्सेदारी कितनी होनी चाहिए।

और इसी का फायदा वर्तमान में कांग्रेस ओबीसी हितैषी बन कर उठाना चाहती हैं। जिससे देश के मूलनिवासियों को सावधान रहना चाहिए, क्योंकि याद रहे कांग्रेस और बीजेपी दो ऐसे जहरीले सांप है जो एक ही थाली (आरएसएस) से दूध पीती हैं और देश के मूलनिवासियों को डसने का काम करती हैं।

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