लखीमपुर खीरी हिंसा : किसानों को गाड़ी से कुचलने का वीडियो वायरल

क्या किसान आंदोलन के खिलाफ हिंसा का सहारा लिया जा रहा है ?
लखीमपुर खीरी हिंसा का असली जिम्मेदार कौन है?
गाड़ी के ड्राइवर को क्या किसी ने ऐसा करने को कहा था?

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन से लौटने वाले किसानों को वाहन से कुचलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एक बार फिर से राज्य एवं केंद्र की भाजपा सरकार की तेज आलोचना हो रही है।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 2 अक्टूबर रविवार को हुई हिंसा के बाद पूरे देश में सरकार की निंदा हो रही है और इस घटना को लेकर निंदा प्रदर्शन किया जा रहा है हालांकि सोमवार को किसान और प्रशासन के बीच समझौता हुआ। लेकिन उसके बाद भी उपजा बवाल अभी तक शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

बीते सोमवार को ‘ट्रैक्टर फॉर ट्विटर’ नामक हैंडल से ये वीडियो ट्वीट किया गया था, जिसमें ये देखा जा सकता है कि शांतिपूर्ण ढंग से जा रहे किसानों को पीछे से आ रही दो गाड़ियों ने कुचल दिया। यह गाडी

पूरा मामला यह है कि, लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में रविवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का किसान विरोध कर रहे थे। विरोध के बाद लौटते किसानों पर पीछे से गाड़ी चढ़ा दी गई। यह गाड़ी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की है। बेफिक्र गाड़ी से उड़ाने से कई किसानों को गंभीर चोंटे आयी। इस हादसे में चार किसानों की मौत हो गई।

किसानों द्वारा आरोप है कि किसानों पर यह गाड़ी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने चढ़ाई, जिससे कुचलकर किसानों की मौत हो गई।

इस जानलेवा हादसे के बाद हुयी अफरातफरी में चार किसानों के अलावा एक पत्रकार की भी मौत हुई है तथा तीन अन्य लोग भी मारे गए।

इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

अब सवाल उठता है कि आखिर लखीमपुर खीरी में हुई इस हिंसा का असली जिम्मेदार कौन है? क्या किसानों को उकसाया गया? बेफिक्र होकर गाडी से कुचलने वाले को क्या किसी ने ऐसा करने को कहा था? अगर कहा था तो किसने? इस गाडी में कौन कौन लोग थे? इसके साथ आ रही अन्य गाड़ियों में कौन थे?

इस मामले को लेकर गोदी मीडिया से भी लोगों ने अनेक सवाल किये है। गोदी मीडिया के अखबार और टीवी चैनलों पर बहिष्कार करने का आवाहन किया जा रहा है।

सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या किसान आंदोलन ख़तम करने के लिए हिंसा भड़काई जा रही है ? और क्या इसके पहले भी CAA के आंदोलन को कुचलने के लिए भी हिंसा का सहारा लिया गया था ?

अगर ऐसा है तो इसके पीछे का तर्क यह है- किसी भी आंदोलन में अगर हिंसा होती है तो संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन होता है फिर आपके आंदोलन की सुरक्षा संविधान नहीं कर सकता। और जय जवान – जय किसान का नारा देने वाले इस देश में जवानों को किसानों के खिलाफ खड़ा कर दिया जायेगा। जिसके परिणाम पर किसान नेताओं को गिरफ्तार किया जायेगा और आखिर में किसान आंदोलन खत्म हो जायेगा।

अगर ऐसा है तो इसमें संविधान विरोधी नियत वाले राजनैतिक दलों का ही फायदा होगा।

इस विषय पर आपके विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बताये… ऐसे ही अन्य मुद्दों पर जानकारी पाने एवं मूलनिवासी बहुजनों से जुडी अन्य खबरों MNT न्यूज़ नेटवर्क को युटुब पर सब्सक्राइब करे और फेसबुक पेज को लाइक लाइक और फॉलो करना न भूले ।। जय भीम -जय मूलनिवासी।।

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