सुप्रीम कोर्ट ने छोड़ा प्रदर्शन कर रहे पहलवानों का साथ।

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पिछले कई दिनों से देश के पहलवान समेत अन्य एथलीट भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप था की दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। जिसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अब कोर्ट ने भी याचिका पर सुनवाई बंद कर दी हैं।

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पहलवानों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिका पर सुनवाई बीते दिनों अदालत ने बंद कर दी हैं। कोर्ट ने ये कहते हुए सुनवाई बंद कर दिया की, याचिका में केस दर्ज करने की मांग पूरी हो गई है। याचिकाकर्ता किसी और राहत के लिए हाईकोर्ट का रुख़ कर सकते हैं।

बताते चलें की भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवान खिलाड़ियों और नाबालिक का यौन उत्पीडन करने का आरोप हैं।

शिकायतकर्ता खिलाड़ियों का आरोप था की दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर रही हैं। जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद दिल्ली पुलिस द्वारा आरोपी बृजभूषण शरण सिंह के ऊपर एफआईआर दर्ज की गई हैं। लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी के पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने
महिला पहलवानों द्वारा दर्ज उस याचिका पर कार्यवाही बंद कर दी, जिसमें वे चाहती थीं कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के उनके आरोपों की जांच की जाए।

बताते चले की बीते चार मई को याचिका पर सुनवाई बंद करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा की, याचिका का उद्देश्य एफआईआर दर्ज करना था, जो अब दर्ज हो गई है। एफआईआर दर्ज होने के अलावा इस अदालत ने शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ अन्य निर्देश पारित किए थे। हम अब कार्यवाही बंद करते हैं।

लेकिन दूसरी ओर याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र हुड्डा ने अदालत से कार्यवाही बंद नहीं करने की सिफारिश की हैं। उनका मानना है की अगर ऐसा किया जाता है तो दिल्ली पुलिस ‘अपने कदम पीछे खींच सकती है।

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