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सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश और दिल्ली में।
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इस देश में अल्पसंख्यकों द्वारा दर्ज शिकायतों में पिछले कुछ सालों से वृद्धि देखी गयी हैं। जिसमे सबसे अधिक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज की गई हैं। अल्पसंख्यक आयोग द्वारा पेश आंकड़ो के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में अल्पसंख्यक समुदायो द्वारा दर्ज शिकायतों में लगभग आधे मामले उत्तर प्रदेश के थे।
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इस देश में मनुवादी ताकतों द्वारा अक्सर देश के मुश्लिमो और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को प्रताड़ित किया जाता रहा हैं। बीते दिनों अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ो के मुताबिक, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को प्राप्त शिकायतों की संख्या में पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान भारी वृद्धि हुई है।
इन शिकायतें में अधिकांश मामले मुसलमानों द्वारा दर्ज कराई गई हैं। और इन मामलों में ज्यादातर शिकायतें उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज किए गए हैं। आंकड़ो के मुताबिक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मुस्लिम समुदाय से लगातार छठी बार सबसे ज़्यादा शिकायतें मिली हैं।
आंकड़ो के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में 1,463, 2021-22 में 2,076 और चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 10 महीनों में 1984 शिकायतें मिली हैं।
अगर हम वित्त वर्ष 2020-21के आंकड़ो पर गौर करें तो उनमें से 732 शिकायतें केवल उत्तर प्रदेश से प्राप्त की गई हैं। जो देश भर में प्राप्त सभी शिकायतों की लगभग आधी थीं । वही इस वित्त वर्ष दिल्ली में 106 और महाराष्ट्र से 60 शिकायतें दर्ज की गईं थी।
वही वित्त वर्ष 2021-22 की बात करें तो इस वर्ष अल्पसंख्यक मामलों में पूरे देश से प्राप्त आंकड़ो में उत्तर प्रदेश से 745, दिल्ली से 227 और महाराष्ट्र से 140 शिकायतें दर्ज की गईं। जबकि वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 10 महीनों में यूपी से 783, दिल्ली से 204 और महाराष्ट्र से 119 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं थी।
आंकड़ो के अनुसार अल्पसंख्यकों में मुस्लिम समुदायों की सबसे अधिक शिकायत उत्तर प्रदेश, दिल्ली औऱ महाराष्ट्र में दर्ज हुई हैं। जिसमे उत्पीड़न और भेदभाव के सर्वाधिक मामले शामिल हैं।
आंकड़ो के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 1,105 शिकायतें दर्ज की थीं, जो 2021-22 में बढ़कर 1,420 हो गईं। जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में 31 जनवरी तक उनके द्वारा 1,279 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।







