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मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से निकल कर आया हैं जहा तीन द्विज आरोपियों ने एक मुस्लिम युवक को पेड़ से बांधकर पिटाई की, उसका सिर मुंडवाया और जय श्री राम के नारे लगाने पर मजबूर किया। आरोप है की इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बजाय पीड़ित युवक को ही जेल में डाल दिया ।
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भारत का संविधान देश को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है। साथ ही देश के नागरिकों को चाहे वो किसी भी धर्म, जाति, समुदाय से संबंध रखता हो उन्हे संविधान मौलिक अधिकार देता हैं जिनमे से एक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार हैं।
संविधान का अनुच्छेद पच्चीस, धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है, जिसमें किसी धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, अभ्यास करने और प्रचार करने का अधिकार शामिल है। लेकिन संविधान यह कभी इजाजत नहीं देता की आप किसी धार्मिक नारे को जबरन किसी पर थोप या उन्हें बुलवाने पर मजबूर करें।
ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिसमे कट्टर हिंदू पंथी लोग विशेष कर मुस्लिमों को टारगेट करते हैं और उनसे अपमानजनक घटनाए करते हैं। जैसे उनका सिर मुंडवा देना, दाढ़ी मुंडवा देना, मारना और धार्मिक नारे लगाने पर मजबूर करना।
ऐसा हीं एक मामला हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से निकल कर आई हैं। जहा द्विज सौरभ ठाकुर, द्विज गजेंद्र और द्विज धनी पंडित नामक तीन आरोपियों ने एक मुस्लिम युवक साहिल खान को मोबाइल चोरी के आरोप में पेड़ से बांधकर पिटाई की, उसका सिर मुंडवा दिया और जय श्री राम के नारे लगाने पर मजबूर किया।
यह घटना बीते चौदह जून, दो हजार तेईस की हैं। पीड़ित की बहन रुबीना के अनुसार, पीड़ित साहिल एक दिहाड़ी मजदूर हैं। जो घरों में पुताई का काम करता हैं। घटना के दिन वह काम पर निकला पर घर आने में देर हो गई । घटना की जानकारी मिलते ही साहिल खान की बहन शिकायत लेकर थाने पहुंची।
रुबीना का आरोप है की, जब वह मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंची तो पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की और उसके भाई साहिल खान को ही पंद्रह जून को गिरफ्तार कर लिया ।
लेकिन मामले की जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया में वायरल हुई तो पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया । जिसके बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया । जबकि द्विज धनी पंडित अब भी फरार हैं।






