★ मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी समाज का राष्ट्रीय सामाजिक संगठन।
★ 26 और 27 नवंबर 2021 को दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन।
★ पीपीआईडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी डी बोरकर उदघाटन करेंगे।
★ देशभर से मूलनिवासी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित हो रहें हैं।
मूलनिवासी संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन 26 और 27 नवंबर 2021 को प्रयागराज, उत्तरप्रदेश में हो रहा है। 26 नवंबर, जिस दिन संविधान सभा द्वारा भारत का संविधान इस देश को सौंपा गया था, उसकी 72 वीं सालगिरह को मूलनिवासी अधिकार दिवस के रूप में मनाते हुए यह दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हो रहा है।
आपको बता दें कि मूलनिवासी संघ यह मूलनिवासी बहुजनों अर्थात एससी एसटी ओबीसी और इनसे धर्मान्तरित अल्पसंख्यकों का राष्ट्रीय सामाजिक संगठन है। मूलनिवासी समाज की समस्याओं का संवैधानिक मार्गों से समाधान करने हेतु समाज को जागृत, संगठित और संघर्ष के लिए तैयार करने के लिए यह संघ कार्य कर रहा हैं। मूलनिवासी समाज का कोई भी नागरिक जो भारतीय संविधान की मूल्यों में विश्वास रखता है वह इसका कार्यकर्ता बन सकता है। मूलनिवासी संघ की स्थापना वर्ष 1993 में इसी इलाहाबाद में अर्थात आज के प्रयागराज में बामसेफ के राष्ट्रीय अधिवेशन में हुई थी।
26 और 27 नवंबर, 2021 को हो रहे इस राष्ट्रीय अधिवेशन का उदघाटन पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया के अर्थात पीपीआईडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी डी बोरकर करेंगे। अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ जी एस कश्यप , राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग एसोसिएशन उपस्थित रहकर संबोधित करेंगे। इस राष्ट्रीय अधिवेशन का उदघाटन मूलनिवासी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर उमेश चंद्र गोंड करेंगे।
मूलनिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर हो रहे इस अधिवेशन में देश भर से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि सहभाग ले रहे हैं। इस दो दिवसीय अधिवेशन में मूलनिवासी समाज, देश और संविधान से जुड़े हुए ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होने जा रही है।
आनेवाले वर्ष में उत्तराखंड पंजाब और उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इनको देखते हुए मूलनिवासी संघ किस प्रकार मूलनिवासी समाज को जागृत और संगठित कर सकता है इस पर भी विचार होने जा रहा है।








