पीपीआई(डी) के बैनर तले मूलनिवासी पहचान दिवस का आयोजन। सैकड़ो लोगो की उमड़ी भीड़

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सीधी मध्य प्रदेश में मूलनिवासी पहचान दिवस का आयोजन।

पीपीआई(डी) के कई राष्ट्रीय स्तरीय पदाधिकारी रहे उपस्थित।

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दिनांक 27 नवंबर , 2022 (रविवार ) को मध्यप्रदेश के सीधी में पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) द्वारा मूलनिवासी पहचान दिवस का आयोजन किया गया । जिसमें कई राष्ट्रीय स्तरीय, प्रदेश स्तरीय और जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहें।

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दिनांक 27 नवंबर 2022 दिन रविवार को मध्य प्रदेश के सीधी जिले में उपस्थित छत्रसाल स्टेडियम में पीपीआई(डी) यानी पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया ( डेमोक्रेटिक) ले बैनर तले एक दिवसीय मूलनिवासी पहचान दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ो लोगो की भीड़ उमड़ी। जिन्हें उपस्थित पदाधिकारियों में संबोधित किया।

लोगो को संबोधित करते हुए पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू० हेमराज सिंह पटेल सर ने अपने भाषण में कहा कि, “मूलनिवासी पहचान प्रतिस्थापित करने का मतलब यह है कि हम इस देश में जाति निहित समाज का निर्माण करने जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि, “ब्राह्मणवादी चतुर वर्ण व्यवस्था में हमारे लिए कोई अधिकार नहीं थे। हमें कोई सम्मान नहीं था । हमारी कोई हैसियत नहीं थी और कोई समृद्धि नहीं थी। तथागत गौतम बुद्ध के विचारों से प्रेरित होकर कबीर, संत नानक, रविदास, झलकारी बाई आदि। इन तमाम हमारे महापुरुषों के विचारों से प्रेरित होकर राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज और डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर और इनके बाद के भी हमारे महापुरुषों ने मूलनिवासी समाज को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय दिलाने का काम किया।

पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता मू० एस० एस० धम्मी सर ने कहा कि, “यह देश एक ऐसा देश है जहां मूलनिवासी बहुमत में है, लेकिन प्रजातंत्र होते हुए भी मूलनिवासी शासक वर्ग नहीं बना हैं। यह दुनिया की एकमात्र उदारहण है जो दुनिया की और किसी प्रजातांत्रिक देश में देखने को नहीं मिलेगी ।” उन्होंने कहा कि, “हमारे जागरूकता के अभाव में, हमारे संविधान और हमारे समाज के दुश्मनों ने तथा हमारे आंदोलन के विरोधियों ने इस प्रजातंत्र को इस ढंग से इस्तेमाल किया कि हमारे मूलनिवासी समाज को शासक वर्ग नहीं बनने दिया गया।”

डॉ० के० एस० चौहान ( सीनियर एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली) ने कहा कि, “किसी भी सामाजिक व्यवस्था के बहुत सारे कारण होते हैं और ज्यादातर जगह जिन लोगों का शासन होता है वह मेजॉरिटी में होते हैं । लेकिन हमारा एक ऐसा देश है, जिसमें हम मेजोरिटी में तो हैं पर हमारा शासन नहीं है।”

उन्होंने कहा कि, “जो सामाजिक व्यवस्था होती है वह व्यस्था उस समाज को आगे बढ़ाने के लिए होती है। लेकिन जो हमारी सामाजिक व्यवस्था है उसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और उनसे धर्म परिवर्तित लोग तकरीबन 90 फ़ीसदी है और उस 90 फ़ीसदी लोगों को बहुत बड़े पैमाने पर प्रताड़ित भी किया जाता है। जिसका कोई रिप्रेजेंटेशन भी नहीं है।”

पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मू० बी० डी० बोरकर सर ने कहा कि, “साढ़े तीन हजार साल तक यहां कोई जाति नहीं थी। ब्राह्मणों ने जाति राजनीति करने के लिए बनाई है। जाति इस राज्य की पहचान बन गयी हैं। ” उन्होंने कहा कि, “समाज जीवन में आर्यों ने जाति को परोया। आर्यों के आने से पहले भारत में जाति नहीं थी। उन्होंने (आर्यों ने) जाति इसलिए बनाया क्योंकि उनको पता था कि यहां हम मूलनिवासी बहुत ज्यादा मात्रा में है।”

राष्ट्रीय अधिवेशन के अवसर पर आयोजित मूलनिवासी पहचान दिवस पर मंथन कर कई प्रस्ताव पारित किए गए । जिसमे सम्पूर्ण देश में कार्य करने का संकल्प लिया गया। इसके अलावा इस एक दिवसीय कार्यक्रम में मूलनिवासी समाज की प्रमुख समस्याएं क्या है? इन समस्याओं का कारण क्या हैं? और इन समस्याओं का निवारण कैसे होगा? पर विशेष चर्चाएं हुई।

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