साथियों अभी संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस सत्र में वर्तमान मोदी सरकार पूरी तरह से बैकफूट पर दिखाई दे रहाई है। संसद में पूछे जा रहे कई सवालों पर मोदी सरकार घेरे में हैं। सरकार को एक गंभीर सवाल पूछा गया कि इस वित्तीय वर्ष में बैंकों द्वारा क्या 1.5 लाख करोड़ रुपये रिटेन ऑफ किए हैं? अगर हां तो उन कॉर्पोरेट के के नाम क्या है जिनके लोन को रिटेन ऑफ किया है?
मोदी सरकारण ने जवाब दिया कि आरबीआई के डेटा के अनुसार शेड्यूलड़ कमर्शियल बैंकों द्वारा इस वित्तीय वर्ष की पहले छह माह में 46382 करोड़ रुपये रिटेन ऑफ किए गए हैं।
आपको बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है कि इस प्रकार से लोन को माफ किया गया है। वर्तमान मोदी सरकार की बात करें तो इस सरकार के पहले कार्यकाल में, 2015 से 2019 के बीच 7,94,354 करोड़ रुपये के कर्ज को राइट ऑफ किया था।
साथियों मीडिया की भाषा में रिटेन ऑफ को माफ किया जाना कहा जाता है। अर्थात सरकार के इस कथन का अर्थ लगायें तो 46382 करोड़ रुपये माफ किए गए हैं। लेकिन यह किन उद्योगपतियों के माफ किए गए है? इसका सरकार ने जवाब नहीं दिया है।
आप को बता दें कि जो लोन वसूला नहीं जा पा रहा हो, उसे ‘राइट-ऑफ’ कर दिया जाता है। तकनीकी रूप से राइट-ऑफ करने से लोन की वसूली प्रक्रिया रुकती नहीं है, आगे कभी पैसा लौटने की उम्मीद बनी रहती है। लेकिन इस बात पर भी ध्यान रखना जरूरी है कि जब लाखों करोड़ रुपये राइट ऑफ किए जाते हैं तो उसमें से कितने वसूले गए? अगर नहीं वसूले गए तो एक तरह से वह माफ ही हुए।
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