देश संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। भले ही अभी सर्दी का मौसम है लेकिन संसद में माहौल बहुत है गर्म है। मोदी सरकार के नाम से प्रचारित वर्तमान सरकार चारों तरफ से निशाना बन गई है। इसके लिए इस सरकार की करतूतें ही जिम्मेदार हैं। इस संसद सत्र के पहले देश के प्रधानमंत्री ने टीवी के माध्यम से तीन कृषि कानूनों का वापस लेने का ऐलान किया। शीतकालीन संसद सत्र में इसकी कारवाई पूरी हो गई। विपक्ष से इस बात पर चर्चा की मांग की जाती रही। लेकिन जिस प्रकार से हंगामे में यह बिल पारित हुआ उसी प्रकार से हंगामे में ही यह बिल वापिस भी लिया गया। सरकार बैकफूट पर गई है।
लेकिन सरकार की मुसीबतें कम नहीं हुई है। अब एक नई बात इसमें जुड़ी हैं। मोदी सरकार को संसद में लिखित रूप में एक सवाल पूछा गया। जिसका जवाब आप पढ़ेंगे तो परेशान तो जरूर होंगे आप हैरान भी रहेंगे।
लोकसभा में सरकार से सवाल पूछा गया था कि जिन किसानों की मौत हुई है, उनके परिजनों को मुआवजा देने के लिए सरकार की तरफ से कोई प्रस्ताव तैयार किया गया है या नहीं? इस पर लिखित उत्तर में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने संसद को बताया कि सरकार के पास किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
अगर सरकार कह रही हैं कि उनके पास इसप्रकार का कोई आँकड़ा नहीं है तो जाहिर है कि मृत किसानों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने में अभी सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है। दूसरी तरफ संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि किसान आंदोलन की मांगों को पूरा करने के लिए अबतक 686 किसानों के प्राण गए हैं।
ऐसे में सरकार द्वारा दिया गया यह लिखित बयान सरकार को और मुसीबत में फंसा रहा है।
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