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इस देश में सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या हैं? और लोग सरकारी अस्पतालों पर कितना भरोसा करते हैं? आज इस विश्लेषण में हम आपको बताएंगे। कैसे लोग मजबूरी में सरकारी अस्पतालों में अपना इलाज करवाते हैं , वरना हर किसी की पहली पसंद निजी अस्पताल ही होता हैं।
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भारत की स्थिति बेहद ही दयनीय हैं। आज देश के लोगो के लिए बढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी के साथ साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और बेहतर शिक्षा एक महत्वपूर्ण समस्या बनी हुई हैं।
देश में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति बहुत ही दयनीय हैं। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था इस देश में बेहद ही महंगी हो चुकी हैं।
इस देश के आम लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने के लिए मजबूर हैं, वरना इलाज के लिए हर किसी की पहली पसंद निजी अस्पताल ही हैं।
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना के आधे से अधिक लाभार्थियों ने निजी अस्पतालों में इलाज करवाया हैं।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दो हजार अठारह में शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना के तहत ख़र्च किए गए कुल धन का दो-तिहाई हिस्सा निजी अस्पतालों को गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक पंद्रह राज्यों में निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले व्यक्तियों क राष्ट्रीय औसत चौवन फीसदी से अधिक रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, सूचीबद्ध सभी अस्पतालों में सरकारी अस्पतालों की हिस्सेदारी अंठावन फीसदी है, इसके बाद भी शहरी क्षेत्रों के साठ फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों के बावन फीसदी मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती होते हैं। जबकि निजी अस्पतालों का व्यय
काफी अधिक होता हैं और यह बात सरकार भी मानती हैं।
सरकारी डेटा के मुताबिक, निजी अस्पतालों में औसत चिकित्सा व्यय सरकारी अस्पतालों की तुलना में छह से आठ गुना अधिक होता है।
रिपोर्ट बताती हैं कि, हर साल निजी अस्पतालों का रुख करने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इस योजना के तहत सूचीबद्ध हर दस में से छह अस्पताल सरकारी हैं, लेकिन जब भर्ती होने की बात आई तो चौवन फीसदी मरीजों ने योजना के तहत इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख किया।
उदाहरण के लिए, साल दो हजार अठारह – उन्नीस में राज्य के बावन हजार दो सौ दो लाभार्थियों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराया।
जबकि अगले ही वर्ष तीन सौ सौलह फीसदी बढ़ोतरी के साथ यह संख्या बढ़कर दो लाख सत्रह हजार लाभार्थियों तक पहुंच गई।
वही इसके अगले चार वर्षों में भी यह संख्या लगातार बढ़ती गई । यह आंकड़े साबित करती हैं की सरकार, सरकारी अस्पतालों के प्रति कितनी ईमानदार हैं।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति बेहतर हो जायेगी तो फिर निजी अस्पतालों में कौन जाएगा? और जब लोग इलाज करवाने नही जायेंगे तो पूंजीपतियों और उन नेताओं को लाभ कैसे होगा ? जिन्होंने करोड़ो रुपए लगाकर बड़े बड़े अस्पतालों की दीवारें खड़ी की हैं।





