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बीते चौबीस सितंबर, दो हजार तेईस को उत्तराखंड के टनकपुर में बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स के द्वारा बीएस फोर के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमे प्रशिक्षक के रूप में बामसेफ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मूलनिवासी दयाराम साहनी जी उपस्थित रहें।
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बीते चौबीस सितंबर, दो हजार तेईस दिन रविवार को उत्तराखंड के टनकपुर में बीएस फोर के अंतर्गत बामसेफ और उसके आफ शूट विंग्स द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमे भारी संख्या में मूलनिवासी साथी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में बामसेफ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मूलनिवासी दयाराम साहनी जी उपस्थित रहे।
साथ ही कार्यक्रम में बामसेफ जनपद चंपावत के अध्यक्ष मूलनिवासी हरिशराम विश्वकर्मा एवं बामसेफ के जिला महासचिव मूलनिवासी अनिल कुमार तथा जिला कार्यकारिणी के कई कर्मठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जिनके प्रयासों से बामसेफ का यह एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न रहा।
कार्यक्रम में लगभग अस्सी मूलनिवासियों ने सहभाग किया। जिसमें महिलाएं भी शामिल थी। यह शिविर सुबह के दस बजे प्रारंभ की गई जो शाम के पांच बजे तक चली।
संविधान प्रबोधक माननीय दयाराम सर ने शूद्रों और महिलाओं अर्थात भारत के मूल निवासियों के साथ हो रहे उत्पीड़न, अन्याय पर विस्तारपूर्वक अपनी बाते रखी।
उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में तथ्यों के आधार पर अवगत किया कि, भारत के मूल निवासियों के साथ जिनमें मूल निवासी महिलाएं भी शामिल है, का उत्पीड़न सत्ता के सहयोग के बगैर संभव नहीं हो सकता है।
उन्होंने देश में चल रहे वर्तमान विवादों पर भी विस्तार पूर्वक चर्चा की। सनातन धर्म और संस्कृति क्या है? उसको विश्लेषण के साथ समझाया और स्पष्ट किया की आर्य ब्राह्मण तथागत बुद्ध के दर्शन को अपना दर्शन बताकर देशवासियों को भ्रमित करने का प्रयास किया है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा की, मूल निवासी समाज के बुद्धिजीवियों ने हिंदू धर्म का विश्लेषण के साथ जब-जवाब दिया तो आर्य पुत्र सनातन धर्म और सनातन संस्कृति की बात उठाने लगे और अब वही बुद्धजीवी वर्ग उनकी सनातन धर्म और सनातन संस्कृति पर बौद्धिक प्रहार करना शुरू कर दिया है, अब वे कहां भाग कर जाएंगे, कौन से शब्द का प्रयोग आगे करेंगे यह भविष्य ही बताएगा।
उन्होंने बताया कि, भय और भ्रम ब्राह्मणों का हथियार है । जिसके माध्यम से वे लोकतांत्रिक भारत में सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठे हुए हैं और वे शासन संविधान से न चलाकर अपनी आर्य ब्राह्मणी सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से चला रहे हैं।
उन्होंने रामायण, महाभारत, गीता को धर्म शास्त्र नहीं बल्कि षडयन्त्रकारी राजनीति शास्त्र कहा। जो साम – दाम – दंड – भेद और छल- कपट से भरा पड़ा है, जिसका उपयोग और प्रयोग आर्य ब्राह्मण, क्षत्रियों के बल और वैश्यों के धन से ब्राह्मणवाद की सुरक्षा में करते हैं।
उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि, हमारा संविधान देश के समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करता है। किंन्तु आर्य पुत्र भारत के मूल निवासियों को हिस्सेदारी देने की बात तो बहुत दूर, उसपर चर्चा तक नहीं करते।
इसलिए बामसेफ संगठन और उसके आफसूट विंग्स बीएस फोर के माध्यम से जनजागरण पैदा कर आर्य ब्राह्मणी संस्कृति को विध्वंस करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा की, बामसेफ संगठन जातियों में बिखरे हुए लोगों की जमात बनाना चाहता है क्योंकि बिना जमात बने भारत का मूलनिवासी बहुजन समाज शासक नहीं बन सकता और जब तक वह शासक नहीं बनेगा, तब तक वह अपने समाज का भला नहीं कर सकता।
उपस्थित लोगों ने प्रबोधक मूलनिवासी दयाराम जी के व्याख्यान से प्रभावित होकर संगठन के संवर्धन और संगठन को और अधिक सशक्त बनाने में अपनी- अपनी भूमिका निभाने का खुलेतौर पर आश्वासन दिया । साथ ही संगठन में जिम्मेदारी लेने की बात भी कही।
इसके अलावा उपस्थित मूलनिवासियों ने यह आश्वासन दिया कि वे जनपद चंपावत में बामसेफ संगठन के सभी आफसूट विंग्स को खड़ा करने में युद्ध स्तर पर कार्य करेंगे।








