आप में से कई लोग इस बात को जानते होंगे कि आनेवाले वर्ष 2022 में करीब 5 राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। जिसमें पंजाब, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड की चर्चा जोरों पर है।
कई राजनैतिक दलों ने अभी से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की विधान सभा में 403 विधायक चुने जाते हैं। तो उसके मुकाबले उत्तराखंड में 70 और पंजाब में 117 विधानसभा सीट हैं।
फरवरी मार्च 2022 में उत्तर प्रदेश के साथ साथ, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अक्टूबर तथा दिसम्बर 2022 में हिमाचल और गुजरात का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
उत्तर प्रदेश में वर्त्तमान विधानसभा में कूल मिलाकर 260 सदस्य प्रथम बार चुने गए हैं। उनमें से सर्वाधिक 216 एमएलए बीजेपी के है। बीजेपी के वर्तमान विधासभा में 304 विधायक है।
आपको बता दें कि जैसे जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है वैसे वैसे अखबारों में कई सुर्खियां तैर रही है। ऐसी ही एक सुर्खी है चुनाव आयोग के आयुक्त के बारे में। इस बात पर बड़ी चर्चा हो रही है कि मौजूदा चुनाव आयोग के तीन बड़े अधिकारी उत्तर प्रदेश से है।
इनमें से सुशील चंद्र, मुख्य चुनाव आयुक्त है। राजीवकुमार और अनूप चंद्र पांडे चुनाव आयुक्त है। अब आगे उत्तरप्रदेश का विधानसभा चुनाव होने की वजह से चर्चा यह हो रही है कि क्या यह संयोग से ऐसा हुआ है? सोशल मीडिया में यह भी चर्चा है कि बीजेपी के साथ इनके अच्छे संबंध है।
जानकारी के लिए बता दें कि अनूप चंद्र पांडे उत्तरप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी है। वे कई साल उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रहे हैं। सुशील चंद्र सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी है उन्होंने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डाइरेक्ट टैक्सेस का चेयरमैन पद संभाला है। और राजीव कुमार 1984 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी थे और भारत सरकार में फाइनेंस सेक्रेटरी थे। यह तीनों अधिकारी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं।
उत्तरप्रदेश में बीजेपी के सामने अंदरूनी और बाहरी अनेक चुनौतियां है। जिसके चलते बीजेपी के लिए यह चुनाव काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी के नेतृत्व वाले राज्य सरकार का कोरोना महामारी के दौरान कुप्रबंधन, पार्टी अंतर्गत ठाकुर, ब्राह्मण और अन्य पिछडा वर्ग का विवाद, पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को बढ़ता विरोध से बीजेपी के लिए चुनौती है।
आपको बता दें की हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल आदि पांच राज्यों के चुनाव के वक्त चुनाव आयोग पर चारों तरफ से आलोचना हो गयी। चुनाव आयोग पर यहां तक आरोप लगाए गए कि उसने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुविधानुसार चुनाव प्रबंधन किया। कोरोना तामिलनाडु में महामारी को लेकर भी चुनाव आयोग की आलोचना हुयी।
अब अगले वर्ष करीब 7 राज्यों के चुनाव सामने है। ऐसे में चुनाव आयोग अब फिर एकबार आलोचना का शिकार हो गया है कि इसके तीन महत्वपूर्ण अधिकारी, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त उत्तरप्रदेश से ताल्लुक रखते हैं।






