यूपी के बिजली कर्मचारियों ने क्यों किया हड़ताल?

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क्या है बिजली कर्मचारियों की मांग ?

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बीतें दिनों उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने बिजली उत्पादन इकाइयों के निजीकरण के विरोध में लगभग तीन दिनों तक हड़ताल किया। जिसे बीते रविवार ऊर्जा मंत्री के साथ तीन राउंड चली बैठक के बाद समाप्त किया गया। इस बीच कई जगहों पर घंटो तक विधुत आपूर्ति बाधित रहीं। जिससे आम जनता काफी परेशान रही।

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देश में निजीकरण के पुरजोर विरोध के बावजूद सरकार मनमाने ढंग से सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में सौंप रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि केंद्र सरकार उन सरकारी कंपनियों का भी सौदा निजी कंपनियों के साथ कर रही हैं। जिससे देश को अच्छा खासा प्रॉफिट हो रहा हैं।

निजीकरण के विरोध समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर बीते दिनों उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने पैसठ घंटे से अधिक समय तक हड़ताल किया।

इस बीच राज्य के कई शहरों जैसे लखनऊ, बनारस, फर्रुखाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, कानपुर, फतेहपुर, गाजीपुर, देवरिया आदि में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही।

बताते चले कि बिजली विभाग के कर्मी पिछले साल ही अपने चौदह सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे । उन्हें दिसंबर में सभी मांगों को पूरा किए जाने का आश्वासन दिया गया था।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है की पिछले साल दिसम्बंर में सूबे के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने समझौते में पंद्रह दिन का समय दिया था। मगर अब तक मांगों को लेकर कोई पहल नहीं किया गया हैं।

जिसके बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं ने चेतावनी दी कि सभी विद्युत कर्मचारी, ऊर्जा निगमों के कनिष्ठ अभियंता, इंजीनियर और संविदा कर्मचारी जल्द ही सामूहिक ‘जेल भरो’ आंदोलन शुरू करेंगे।

खबरों के मुताबिक, इस बीच बलिया जिला प्रशासन ने बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए बिजली विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज करना शुरू कर दिया। बाईस लोगों पर एस्मा एक्ट के तहत एक्शन शुरू करने का निर्णय लिया गया।

बताते चले कि जिस सेवा पर एस्मा लगाया जाता है, उससे संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते, अन्यथा हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को छह माह तक की कैद या ढाई सौ रूपये तक दंड अथवा दोनों हो सकता है।

इसके अलावा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों और दूसरों के काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ भी केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए। मामले में उनतीस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

जिसके बाद प्रसाशन की इस कार्रवाई और बात न सुनी जाने पर कर्मियों का प्रदर्शन और तेज हो गया। जो लगातार तीन दिनों तक चला। बाद में सूबे के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और बिजली कर्मचारी नेताओं के बीच तीसरे राउंड की बैठक में बात बनी और बीते रविवार हड़ताल खत्म हुई।

सरकार की ओर से यह आश्वाशन दिया गया कि जिन तीन हजार लोगों को निकाला गया था, बाईस लोगों पर एस्मा लगाया था और जिन उनतीस लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था, उन सबको सरकार वापस लेगी।

बिजली कर्मचारियों के हड़ताल का मुख्य कारण बिजली उत्पादन इकाइयों का निजीकरण, ऊर्जा निगम अध्यक्ष का नियम विरुद्ध चयन, नोएडा जैसे शहरों में प्राइवेट कंपनियों से बिजली सप्लाई का ठेका वापस लेने की मांग आदि रही।

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