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बीते छब्बीस जुलाई, दो हजार तेईस दिन बुधवार को पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) जिला इकाई, धनबाद द्वारा प्रतिनिधित्व दिवस मनाया गया। बताते चले की छब्बीस जुलाई, उन्नीस सौ दो ईस्वी को छत्रपति साहू जी महाराज ने अपने राज्य क्षेत्र में शोषितों और पीड़ितो के लिए पचास फीसदी प्रतिनिधित्व लागू करने का आदेश जारी किया था।
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छत्रपति साहू जी महाराज भारत के इतिहास में महानतम शासको में गिने जाते हैं। जिन्होंने कोल्हापुर की सत्ता अठारह सौ चौहत्तर से उन्नीस सौ बाइस तक संभाली थी। शाहूजी महाराज ने न्याय एवं समता की स्थापना के लिए जो कदम अपने शासन काल में उठाए, वे आज की सरकारें भी नहीं उठा पाई हैं।
इनकी राज्य में ब्राह्मणों की आबादी मात्र तीन से चार फीसदी थी। लेकिन शासन – प्रशासन के पदों और शिक्षा पर उनकी हिस्सेदारी लगभग अस्सी फीसदी थी। वही दूसरी तरफ राज्य में शोषितों और पिछड़ों की आबादी लगभग नब्बे फीसदी थी, लेकिन राज्य की शासन – प्रशासन और शिक्षा में इस समाज की भागीदारी बहुत कम थी।
छत्रपति साहू जी महाराज ने राज्य की शासन – प्रशासन के पदो और शिक्षा के क्षेत्र में एक विशेष वर्ग के वर्चस्व को कम करने के लिए छब्बीस जुलाई, उन्नीस सौ दो में राज्य के पिछड़ों को पचास फीसदी आरक्षण देने का आदेश जारी किया।
ध्यान देने योग्य बात यह है की यहां पिछड़ों में आज के अनुसूचित जाति और जनजातियों को भी शामिल किया गया था। साहू जी महाराज ने राज्य के नब्बे फीसदी मूलनिवासियों के लिए जिस पचास फीसदी आरक्षण के लिए आदेश जारी किया था उसमे साफ साफ लिखा था की, पिछड़े वर्ग में ब्राह्मण, प्रभु, शेवाई, और पारसी को छोड़कर सब शामिल होंगे।
छत्रपति साहू जी महाराज ने जिस छब्बीस जुलाई को यह आदेश जारी किया था। इस दिन को यादगार बनाने के लिए पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) पूरे देश में इसे प्रतिनिधित्व दिवस के रूप में मना रही हैं।
इसी क्रम में बीते छब्बीस जुलाई को पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया(डेमोक्रेटिक) जिला इकाई, धनबाद द्वारा भी प्रतिनिधित्व दिवस के रूप में बनाया गया।
यह कार्यक्रम झारखंड के धनबाद में स्थित भेलाटांड, जी० आई० सी० कॉलोनी में मनाई गई। जिसमे पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं समेत कई मूलनिवासियों ने भी भाग लिया।







