आरटीआई से प्राप्त एक जानकारी के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव के पहले राजनीतिक पार्टियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 282 करोड रुपये का चंदा इकठ्ठा किया। 2018 में सुरू हुए इस स्कीम के तहत राजनीतिक दलों को लगभग 6,493 करोड रुपयों का चंदा मिल चुका है। द इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी सामने आई है। 19 अक्तूबर से 28 अक्तूबर के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 1 करोड रुपये किमत के 279 बॉन्ड बेचे। तथा 10 लाख रुपए के 32 बॉन्ड की बिक्री की।
प्राप्त डेटा के मुताबिक, एसबीआई की मुंबई स्थित मेन ब्रांच ने 14 वी शृंखला में 130 करोड रुपए के बॉन्ड्स जारी किए। वहीं दिल्ली ने सिर्फ 11.99 करोड के बॉन्ड्स जारी किए। पटना स्थित एसबीआई ब्रांच ने सिर्फ 80 लाख रुपये किमत के बॉन्ड्स की ही बिक्री की। इसके अलावा तीन शहरों में 237 करोडं रुपए के बॉन्ड्स बेचे गए। इनमें भुवनेश्वर से 67 करोड, चेन्नई से 80 और हैदराबाद से 90 करोड के बॉन्ड्स तुडवाए गए।
इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों के फ़ंडिंग के लिए वित्त वर्ष 2017-18 लाया गया है। स्टेट बैंक इंडिया के द्वारा 1000 रू, 10000 रू, 1 लाख रुपए, 10 लाख रुपए और 1 करोड़ मूल्य वर्ग में जारी किया जाते है।
कॉरपोरेट सूत्रों के मुताबिक, इलेक्टोरल बॉन्ड्स के खरीदारों में मुंबई के बड़े बिजनेस हाउस भी आते हैं, क्योंकि इनके जरिए राजनीतिक दलों को गुप्त रूप से फंडिंग मुहैया कराई जा सकती है। दरअसल, इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर एसबीआई की गाइडलाइंस कहती हैं कि इसे खरीदने वालों की पहचान बैंक गुप्त रखेगा और इसका खुलासा किसी भी प्राधिकरण के सामने नहीं किया जाएगा। सिर्फ कोर्ट के आदेश और कानूनी एजेंसी द्वारा आपराधिक केस दायर करने के बाद मांग करने पर ही उनके पहचान का खुलासा हो सकता है।







