बामसेफ प्रत्येक वर्ष अपने सदस्यों, हितचिंतकों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद संपर्क कार्यक्रम करती है. संगठन की मजबूती के लिए जिला स्तर, राज्य स्तर के अधिवेशन आयोजित किये जाते हैं. इस वर्ष भी बामसेफ ने अपने राज्य अधिवेशनों का आयोजन किया। अधिकतर राज्यों के अधिवेशन दिनांक २७ सितम्बर को सम्पन्न हुए.
करीब 10 राज्यों के अधिवेशन सम्पन्न हुए जिनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, आँध्रप्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल है. बाकी राज्यों के अधिवेशन दिनांक ४ अक्टूबर को होने हैं.
कोरोना महामारी के और अनलॉक की प्रक्रिया के कारण कार्यकर्ता बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष उपस्थित रहकर अधिवेशन की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके. लेकिन ऑनलाइन वे अधिवेशन की प्रक्रिया में जुड़ें।
करीब सभी राज्यों ने वर्चुअल पद्धति से कार्यकर्तों और सदस्यों को जोड़ा. इसमें गूगल मीट, ज़ूम मीट के साथ फेसबुक और यूट्यूब से भी कार्यकर्ता अधिवेशन की कार्रवाई में जुड़ें।
इन राज्य अधिवेशनो में पुरे देश भर से बुद्धिजीवी विचारक भी जुड़ें। मुख्यतः दो विषयों पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिनमें : “2020: देश के मूलनिवासी बहुजनों के खिलाफ एक साजिश”और “पिछले 70 वर्षों में संविधान पर अक्षरश: और गर्मजोशी से क्रियान्वयन न करने से ही करोना जैसे कहर से जनता को बचाने में सरकारें पूरी तरह विफल है।” इन विषयों पर चर्चा हुयी। इन विषयों पर विभिन्न राज्यों के प्रोफेसर, अधिकारी कर्मचारी, लेखक, चिंतकों ने अपने विचार रखें
बामसेफ यह सामाजिक संगठन पिछले 45 सालों से समाज में सजग प्रहरी के रूप में व्यवस्था परिवर्तन का काम निरंतर कर रहा है।प्रशिक्षण शिविर, संगोष्ठीया, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय अधिवेशन लेकर उसमें बुद्धिजीवी वर्ग को जोड़कर समाज दिशा देना यह संगठन के कार्य का अभिन्न अंग है।
12 राज्यों में जो अधिवेशन हुआ इस अधिवेशन की सफलता यह सिद्ध करती है कि देश में कैसी भी स्थिति हो, चाहे कितने भी संकट आये उस संकट को निपटने के लिए और सामाजिक क्रांति का लक्ष्य को हासिल करने के लिए कार्यकर्ता मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से भी सक्षम है।








