बिहार में विधानसभा चुनाव की मतदान प्रक्रियाएं चल रही है। जिसपर सारे देश की नजरे गडी हुई है। राजनीतिक पार्टीयों की सभाओं में बडी तादाद में भीड है। नेतागण इन सभाओं में जुबानी तलवार चला रहें हैं। एक दुसरों पर टिप्पणीयां कर रहें हैं। इन सभाओं में जुट रही भीड की उत्सुकता देश भर की जनता तक पहूंचाने के लिए पत्रकार दिन-रात एक कर ग्राऊंड रिपोर्टिंग कर रहें हैं। बडे मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को अच्छी खासी सुविधाए मिल भी जाती है। लेकिन मूलनिवासी, पीडित और पिछडों की आवाज बुलंद करने वालें पत्रकार इनसब से वंचित रह जाते हैं। अगर इन संस्थानों में महिला पत्रकार काम कर रहीं हो तो दिक्कत और भी बड जाती है। उत्सुक भीड कब बेकाबू हो कर दरिंदगी पर उतर आए कोई अंदाजा नहीं। ऐसी ही एक घटना मोतिहारी के गांधी मैदान की सभा को कवर करने वाली द शुद्र की संवाददाता मीना कोटवाल के साथ घटीत हुई। यह घटना भारतीय महिला पत्रकारों के लिए एक धब्बे जैसा है।
मीना कोटवाल गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा कवर करने गई थी। वे वहा लोगों से प्रतिक्रिया ले रही थी। जिसमें उन्होंने उपस्थित लोगों से सवाल पुछे। जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास, जातिवाद और गरीब महिलाओं से संबंधित कुछ सवाल थे। जिससे भाजपा का समर्थन करने वाले कार्यकर्ता आहत हो गए और अभद्रता पर उतर आए।
उन्होंने मीना जी को घेर लिया तथा मोदी विरोध में सवाल पुछने पर जोर-जोर से मोदी-मोदी के नारे लगा रहें थे। मोदी समर्थन में बोलने के लिए लोगों को उकसा रहें थें। इन सब में अनेकों बार मीना जी को धक्का मुक्की का सामना करना पडा। जो उनके लिए अत्यंत लज्जास्पद था।







