जैसे ही बारिश मौसम शुरू होता है बिहार में आनेवाली बाढ़ की चर्चा हर साल होती है। बाढ़ के कारण होनेवाले जानोमाल के नुकसान की खबर मीडिया में खूब चलती है। बिहार में बाढ़ की समस्या आज की नहीं हैं। आजादी के बाद सरकारें बदलती रहीं लेकिन बाढ़ की समस्या को दूर करने को लेकर गंभीरता से विचार होते हुए नहीं दिखाई दे रहा है।
बारिश में गंगा, बूढ़ी गंडक, बागमती, महानंदा, कोसी समेत प्रमुख नदियों में अक्सर जलस्तर बढ़ जाता है। कुछ नदियां अपनी जगह छोड़ दूसरे रास्ते से बहने लगती है। इनमे से गंगा नदी की बात करें तो गंगा में जमा होनेवाला गाद बाढ़ के पानी को फैलने के लिए कारण बताया जाता है। यही हाल अन्य नदियों का भी है। कोसी नदी पर बने तटबंध 1963 के बाद से हमेशा विभिन्न जगहों पर टूटते रहे हैं। लेकिन इसके कारणों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया गया है। बताया जाता है कि बाढ़ रोकने और उससे बचने को लेकर न तो योजनाओं पर ठीक से ध्यान दिया गया और न ही क्रियान्वयन पर। जलनिकासी के अवैज्ञानिक कारण भी बाढ़ का कारण बने हुए है।
बिहार में कूल 38 जिले है। इनमें से औसतन 19 से 25 जिलों को बाढ़ का हर साल सामना करना पड़ता है। बाढ़ प्रभावित जिलों के 36 से 233 प्रखंडों के औसतन साढेचार से सात हजार गांवों के लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
आपको बता दें कि उत्तर बिहार की करीब 76 प्रतिशत आबादी बाढ़ के खतरे में रहती है। देश में बाढ़ से प्रभावित होनेवाले लोगों में से 22 प्रतिशत आबादी केवल बिहार की है। इनमें अधिकतर पिछड़े वर्ग के ही लोग है।
पिछले पांच वर्षों के औसत अनुसार बिहार में बाढ़ से करीब एक करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं। जानोमाल का नुकसान बड़ेपैमाने पर होता है। हरसाल करीब 320 लोगों की बाढ़ में डूबने से मृत्यू होती है।
आपको बता दें कि बाढ़ की समस्या को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य की सांझा नीति की आवश्यकता है। बिहार की कई नदियां नेपाल से आती है और बिहार से होते हुए बंगाल के उपसागर में मिलती है। इन नदियों पर नेपाल की ओर बनाये गए बांधो से पानी छोड़ा जाता है जो बाढ़ का प्रमुख कारण बताया जाता है। इसके लिए नेपाल सरकार के साथ इसपर वार्तालाप होना आवश्यक है। दूसरा यह भी बताया जाता है की नदी में जमा होनेवाला गाद पानी को फैलता है और प्रवाह की दिशा बदल देता है। तीसरा यह बताया जाता है कि नदी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह मजबूत तटबंद का होना आवश्यक है। इन सारी बातों पर केंद्र की भूमिका प्रमुख है।
यह चर्चा अब चारों और है कि हर साल आनेवाली बाढ़ को राजनेता, भ्रष्ट अफसर और ठेकेदारों के लिए “आपदा में अवसर” के रूप में देखा जाता है। इनके लिए यह एक कमाई का मौका होता है। पानी को रोकने, राहत पहुंचाने और पुनर्वास के नाम पर होनेवाले भ्रष्टाचार पर अब खुलेआम चर्चा हो रही है। इसे बाढ़ घोटाले के नाम से जाना जा रहा है।
वर्तमान सरकारें हमेशा पुरानी सरकारों पर दोष मढ़ती है। लेकिन वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार की बाढ़ को लेकर चारों तरफ से घिरे हैं। बीजेपी के साथ गठबंधन से राज्य में मुख्यमंत्री बने हैं और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। लोगों का आरोप यह है कि बाढ़ से प्रभावित अधिकतर लोग मूलनिवासी बहुजन समाज के होने के कारण इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।








