देश में उच्च शिक्षा की क्या हालत है? इस पर नागरिकों में मोटा-मोटी बहस होती है, लेकिन इस पर एक स्वतंत्र गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। जिससे पता चले की शिक्षा की वर्तमान स्थिति वास्तव में क्या है।
भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में जिन्हे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान मने गए है उनमें आईआईटी और ट्रिपलआईटी का अपना एक स्थान है।
ट्रिपल आईटी अर्थात इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी अर्थात भारतीय सूचना प्रोद्योगोकी संस्थान के तहत भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से संचालित 5 संस्थान है और 20 संस्थान पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर चलनेवाले संस्थान है।
लेकिन खबर यह नहीं है
खबर यह है कि इन सरकारी 5 संस्थानों में स्वीकृत 410 संकाय पदों में से 147 पद रिक्त रहने की बात को सरकार ने लिखित रूप से कबूल किया है। लोकसभा में पूछे गए सवाल से यह गंभीर बात सामने आयी है।
20 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक अतारांकित सवाल को लिखित रूप में दिए एक जवाब में मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री ने यह आंकड़े दिए है।
नरेंद्र मोदी सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लिखित रूप से कहा है कि सरकार की पांच इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी संस्थानों में 410 संकाय पदों में 147 पद रिक्त है।
शिक्षा मंत्री दिए गए आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जनवरी 2019 तक कूल 204 संकाय पद रिक्त थे। फरवरी 2020 तक इनमें से केवल 48 पद भरे गए थे।
आपको बता दें इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी यहइंस्टीट्यूट ऑफ़ नेशनल इम्पोर्टेंस अर्थात राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे संस्थान में स्वीकृत संकाय पदों में से 37 प्रतिशत पदों का रिक्त रहना यह अपने आप में गंभीर बात है।
अगर सरकार द्वारा चलाये जानेवाली राष्ट्रीय महत्व की संस्थानों में यह स्थिति है तो इसी श्रेणी में आनेवाली पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की 20 संस्थानों की क्या स्थिति होगी? यह सोचने वाली बात है।
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