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महाराष्ट्र के नवी मुंबई का मामला।
युवक ने मुंह पर थूकने व जूते चटवाने का लगाया आरोप।
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जिस देश मे रक्षक ही भक्षक बना बैठा हो उस देश मे न्याय की कितनी परसेंट गारंटी हो सकती हैं। इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते है। नवी मुंबई का एक मामला निकलकर सामने आया हैं जहाँ दिनेश पाटिल नामक एक इंस्पेक्टर ने जाति के नाम पर एक युवक को प्रताड़ित किया , मारा और चेहरे पर थूका भी।
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भारत में आज भी जातिवाद अपने चरम पर हैं। इसका उदाहरण देश भर में जातिवाद से जुड़ी घट रही घटनाएं हैं। बीते दिनों महाराष्ट्र के नवी मुंबई में पुलिस ने जाति के नाम पर एक युवक को प्रताड़ित किया । युवक ने पुलिस द्वारा उसके मुंह पर थूकने और जूते चाटने पर मजबूर करने का आरोप भी लगाया हैं।
भारत में जातिवाद के कारण लगभग सैकड़ो मूलनिवासी रोज प्रताड़ित होते हैं। उनमें से कितनो की आवाज़ हम और आप तक नहीं पहुंच पाती हैं। और जो आवाज उठाते हैं उनमें से अधिकतर को न्याय नहीं मिल पाता हैं।
एक तरफ देश में दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान हैं। जिसकी वाहवाही करते दुनिया थकती नहीं हैं। भारतीय संविधान के अनुछेद सतरह के अनुसार अस्पृश्यता यानी छुवाछुत एक दंडनीय अपराध हैं।
आर्टिकल सतरह के मुताबिक, “अस्पृश्यता का अंत किया जाता है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास वर्जित है। वास्तव में, अस्पृश्यता से उत्पन्न होने वाली किसी भी अक्षमता को लागू करना कानून के अनुसार दंडनीय अपराध होगा।”
लेकिन आश्चर्य की बात यह कि पुलिस द्वारा ही जातिवाद को बढ़ावा दिया जा रहा हैं । घटना महाराष्ट्र के नवी मुंबई के
कलंबोली पुलिस स्टेशन की हैं। जहाँ के दिनेश पाटिल नामक एक पुलिस इंस्पेक्टर ने मूलनिवासी युवक सत्ताईस वर्षीय विकास उजगारे को बेरहमी से मारा, उसे जातिसूचक गालियां दी । पीड़ित का आरोप हैं कि दिनेश ने उसके मुंह पर थूका और उसे जूतें चाटने पर भी मजबूर किया।
खबर के मुताबिक किसी मामले में पुलिस ने विकास उजगारे को पकड़ कर जेल ले गया। पीड़ित ने अपने शिकायत में कहा कि, ‘रंजिश रखते हुए पाटिल ने मेरे चेहरे और गर्दन पर मारना शुरू कर दिया। इसके बाद वह मुझे घसीटते हुए एक कमरे में ले गए, जहां मुझ पर बेरहमी से हमला किया गया। अधिकारी ने तब मुझसे मेरी जाति के बारे में पूछा, जब मैंने कहा कि मैं एक एससी हूं, तो उन्होंने मेरी जाति को गाली दी और मुझ पर निचली जाति का होने के लिए थूका और अपने जूते चाटने के लिए मजबूर किया।’
पीड़ित का आरोप है कि कई गंभीर चौट लगने के बाद भी पुलिस वाले उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के जगह थाने लेकर गए। उजगारे ने कहा कि, चोट लगने के कारण उन्होंने पुलिस अधिकारियों से उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
विकास उजगारे के अनुसार, थाने में प्रताड़ित और मारपीट करने के बाद सात जनवरी को सुबह करीब तीन बजे कलंबोली पुलिस उन्हें कमोठे के एमजीएम अस्पताल ले गई, वहां छोड़कर चली गई।
उजगारे का दावा है कि मारपीट में लगी चोटों के कारण उजगारे तीन दिनों तक एमजीएम अस्पताल में रहे। जिसके बाद उन्होंने आरोपी पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज की।








