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इस समय देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति है, तो कही सुखा पड़ा हुआ हैं। जिसका कारण कहीं न कही जल निकासी प्रणाली की खराब व्यवस्था हैं। आंकड़ों की माने तो साल दो हजार बारह से साल दो हजार इक्कीस तक बाढ़ से सत्रह हजार से भी अधिक लोगो ने अपनी जान गवाई हैं। जबकि कुल नुकसान ढाई लाख करोड़ से भी अधिक का हुआ हैं।
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पिछले कई दिनों से हरियाणा के विभिन्न जिले बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे हैं। फिलहाल अभी तो स्थिति सामान्य है, लेकिन बाढ़ के वजह से अब तक लगभग पचास से अधिक लोगो की जान चली गई हैं।
साथ ही लगभग ढाई सौ लोगो के घर और करोड़ो रुपए की संपति का नुकसान हुआ हैं। खबरों के मुताबिक हरियाणा के कुछ हिस्सों में आए इस बाढ़ की वजह से इक्कीस हजार बड़े जानवरों ने अपनी जान गवाई हैं।
भारत में जल निकासी की खराब व्यवस्था के कारण हर साल बाढ़ की स्थिति विभिन्न जगहों में देखने को मिलती हैं। सरकारी आंकड़ों की ही माने तो साल दो हजार बारह से दो हजार इक्कीस तक बाढ़ के कारण देश भर में सत्रह हजार से अधिक लोगो ने अपनी जान गवाई हैं।
यह आंकड़े बीते दिनों राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में जल शक्ति राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने दिया हैं। उन्होंने बताया की, कम अवधि की उच्च तीव्रता वाली बारिश की बढ़ती घटनाएं मुख्य रूप से शहरी बाढ़ के लिए ज़िम्मेदार हैं, जो अनियोजित विकास, प्राकृतिक जल निकायों के अतिक्रमण और ख़राब जल निकासी प्रणाली के कारण और भी बढ़ गई है।
उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा की, साल दो हजार बारह से दो हजार इक्कीस तक बाढ़ और भारी बारिश के कारण सत्रह हजार चार सौ बाइस (17,422) लोगो ने अपनी जान गवाई हैं।
जबकि नुकसान की बात करे तो, केंद्रीय जल आयोग यानी सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों के मुताबिक फसलों, घरों और सार्वजनिक उपयोगिताओं सहित कुल नुकसान दो लाख छिहत्तर हजार चार करोड़ (2,76,004.05 करोड़) रुपये का है।
हरियाणा में आई बाढ़ से अब तक दो लाख एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है। इस बाढ़ का कारण लोगो ने जल निकासी की खराब व्यवस्था को बताया है।
जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल द्वारा तीन सौ से अधिक दिनों से जारी धरने में भी बाढ़ के हालातो की बात उठी। लोगो ने सरकार की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। जिसके कारण किसानों के फसल बर्बाद हो चुके हैं।








