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द्विजों ने जलती लकड़ी से युवक को किया घायल।
सभी आरोपी फरार !
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घटना उत्तराखंड से निकलकर आयी हैं। जहाँ सिर्फ मंदिर में प्रवेश करने पर 22 वर्षीय अनुसूचित जाति के युवक की जलती लकड़ी से पूरी रात बेरहमी से पिटाई की गई। शिकायत के मुताबिक सभी आरोपी पूरी तरह नशे में धुत थे। उन्होंने मूलनिवासी युवक को बांध कर उसे बुरी तरह जख्मी किया गया।
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आपने अक्सर आरक्षण विरोधियों को ये कहते सुना होगा कि अब भारत में जातिवाद खत्म हो चुका हैं। नए पीढ़ी के लोग ये सब नहीं मानते। वाकई सुनने में काफी अच्छा लगता हैं। लेकिन भारत में जाति व्यवस्था की स्थिति इन तमाम बयानबाजी के ठीक विपरीत हैं।
आज भी भारत में अस्पृश्यता के सैकड़ो मामले सामने आते हैं। आज भी इस देश में द्रोणाचार्य जैसे गुरुओं की कोई कमी नहीं हैं। जहां, सिर्फ पानी पीने के घड़े को छूने मात्र से बच्चे की जान ले ली जाती हैं। तो कहीं सिर्फ शिक्षक की मोटरसाइकिल छूने पर बेरहमी से पिटा जाता हैं।
दिल दहला देने वाला जातिवाद का एक ऐसा ही मामला उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र के सालरा गांव से निकल कर आई हैं। जहाँ 22 वर्षीय आयुष की पिटाई मनुवादी ताकतों ने इसलिए कर दी क्योंकि वो मंदिर में प्रवेश करने की जुर्रत कर रहा था ।
पीड़ित द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार खुद को उच्च वर्ग मानने वाले कुछ लोगो के झुंड ने मंदिर में उनके साथ मारपीट की, उन्हें बांध दिया और जलती लकड़ियों से उनकी पिटाई की। आयुष ने अपनी शिकायत में कहा है कि, “हमलावर इसलिए नाराज थे कि अनुसूचित जाति से होने के बावजूद उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया।
इस मामले में उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि, आरोपियों की पहचान आशीष, ईश्वर सिंह, भाग्य सिंह, जयवीर सिंह और चैन सिंह के रूप में हुई। लेकिन सभी आरोपी फरार हैं।
इस तरह की घटनाएं उन लोगो और खास कर उन मीडिया वालों के मुंह मे तमाचा हैं जो यह कहते हैं कि इस देश मे जातिवाद खत्म हो चुका हैं। और सबसे हैरान करने वाली बात यह हैं कि यह आंकड़े उस दौर की हैं, जिस दौर में देश उस संविधान से चल रहा हैं जिसने अस्पृश्यता को अपराध माना हैं।







