बीएस फॉर अभियान का समाज में प्रभाव?

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बीएस फॉर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान के कारण मूलनिवासी बहुजन समाज में बहुत ही महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा हैं। इस अभियान के तहत आज महिला, पुरुष, बूढ़े और बच्चें सभी संविधान के महत्व को समझने लगे हैं।

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बामसेफ द्वारा साल दो हजार अठारह में शुरू किया गया बीएस फॉर यानी भारतीय संविधान,सम्मान, सुरक्षा संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान इस समय पूरे देश में सक्रिय रूप से चलाया जा रहा हैं।

इस अभियान के तहत आज राज्यों के विभिन्न जिलों में कई कार्यक्रम और संविधान चेतना रैली का आयोजन किया जा रहा हैं।

हाल ही में देश भर के कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों के विभिन्न जिलों में संविधान विचार गोष्ठी और क्लस्टर अधिवेशन जैसे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किए गए।

इन कार्यक्रमों में मूलनिवासी बहुजन समाज के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया, जिन्हें संविधान के महत्त्व और भारतीय संविधान में दिए अधिकारों और कर्तव्यों को बताया गया।

बीएस फॉर अभियान के तहत आज हजारों संविधान प्रबोधक घर घर जाकर संविधान को बिलकुल ही आसान और सरल भाषा में बता रहे। जिससे हर तरह के लोग संविधान को समझ पा रहे हैं।

बीएस फॉर महा अभियान के कारण आज पढ़े लिखे लोगो के साथ साथ अशिक्षित लोग जिनमे मूलनिवासी महिलाएं भी शामिल हैं, संविधान और संविधान के महत्व को समझने लगे हैं।

आज लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों रहे। इस अभियान के कारण संविधान और अपने महापुरुषों के संघर्षों को समझने लगे हैं।

बीएस फॉर अभियान के कारण ही देश के मूलनिवासी बहुजन समाज यह समझ पाया है की संविधान का हमारे जीवन में क्या योगदान हैं।

आज बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स संगठनों द्वारा बीएस फॉर के अंतर्गत कई बड़े कार्यक्रम किए जा रहे हैं। जिसमें आगामी बाइस अक्टूबर दो हजार तेईस को नागपुर में होने जा रहे पहला राष्ट्रीय पथ संचलन व जनसभा शामिल हैं।

बताते चले की बीएस फॉर अभियान के तहत आगामी बाइस अक्टूबर, दो हजार तेईस दिन रविवार को नागपुर में मूलनिवासियों का पहला राष्ट्रीय पथ संचलन का योजन किया गया हैं। जिसमें देशभर से हजारों की संख्या में मूलनिवासी साथी भाग लेंगे।

साथ ही इस पथ संचलन में बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स जैसे मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, मूलनिवासी सभ्यता संघ, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ समेत कई मूलनिवासी संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित होंगे।

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