जानिए किस आधार पर तैयार की जाती हैं गलोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट के परिणाम?

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हर साल की तरह इस साल भी जीएचआई यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट जारी कर दी गई हैं। जिसमे भारत की स्थिति पिछले साल की तुलना में और अधिक गंभीर बताई गईं हैं। लेकिन जीएचआई हैं क्या? और यह किस आधार पर परिणाम जारी करती हैं?

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आगे बढ़ने से पहले आपको जानना चाहिए की आखिर ग्लोबल हंगर इंडेक्स क्या हैं?

जीएचआई जिसका पूरा नाम ग्लोबल हंगर इंडेक्स जिसे हम वैश्विक भुखमरी सूचकांक भी कहते हैं, यह एक उपकरण है। जिसे वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूख को व्यापक रूप से मापने और ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जो समय के साथ भूख के कई आयामों को दर्शाता है।

जीएचआई का उद्देश्य मुख्य रूप से भूख के खिलाफ संघर्ष के बारे में जागरूकता और समझ को बढ़ाना हैं।

साथ ही इसका उद्देश्य देशों और क्षेत्रों के बीच भूख के स्तर की तुलना करके दुनिया के उन क्षेत्रों पर ध्यान आकर्षित करना है जहां भूख का स्तर सबसे अधिक है और जहां अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

बताते चले की प्रत्येक देश के जीएचआई स्कोर की गणना एक सूत्र के आधार पर की जाती है जो चार संकेतकों को जोड़ता है। जिनमे अल्पपोषण, बच्चों का बौनापन, चाइल्ड वेस्टिंग और बाल मृत्यु दर शामिल हैं।

अब आइए समझते है की इन चारों संकेतकों का मतलब क्या होता हैं?

कोई भी अल्पपोषण या कुपोषण का शिकार तब होता हैं जब उसे पोषण संबंधित कमियां हों। हम सीधे सीधे कह सकते हैं की जो ऊर्जा, प्रोटीन अथवा विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन नहीं करते है वे कुपोषण या अल्पपोषण का शिकार होते हैं।

बच्चों का बौनापन यानी पांच वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों की हिस्सेदारी जिनकी लंबाई उनकी उम्र के हिसाब से कम है, जो दीर्घकालिक अल्पपोषण को दर्शाता है।

चाइल्ड वेस्टिंग में पांच वर्ष से कम उम्र के वैसे बच्चे आते है जिनका वजन उनकी ऊंचाई के अनुरूप कम है या अपर्याप्त भोजन, अथवा डायरिया और श्वास जैसी बीमारियों के कारण उनका वजन कम हो जाता हैं।

वही बाल मृत्यु दर में उन बच्चो को शामिल किया जाता है जो बच्चे अपने जन्म के पांचवें दिन से पहले मर जाते हैं, जो अपर्याप्त पोषण और अस्वास्थ्यकर वातावरण के घातक मिश्रण को दर्शाता है।

अब हाल ही में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत की स्थिति की बात करें तो एक सौ पच्चीस देशों की सूची में भारत एक सौ ग्वारवें स्थान पर आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत पिछले साल की तुलना में चार स्थान और नीचे फिसला है। क्योंकि पिछले साल इस सूची में भारत एक सौ सातवें स्थान पर था।

रिपोर्ट में भारत से नीचे रैंकिंग वाले देशों में तिमोर-लेस्ते, मोज़ाम्बिक, अफ़ग़ानिस्तान, हैती, लाइबेरिया, सिएरा लियोन, चाड, नाइजर, कांगो, यमन, मेडागास्कर, दक्षिण सूडान, बुरुंडी और सोमालिया शामिल हैं।

ये उन देशों की सूची हैं जिनसे भारत का प्रदर्शन बहुत मुश्किल से ही बेहतर रहा है। जबकि भारत की तुलना में ये बहुत छोटी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं।

इस सूची में हर साल की तरह भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति भारत से बेहतर रही हैं। जिनमे पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका जैसे देश भी शामिल हैं।

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