फिर बढ़ी देश में बेरोजगारी। चार महीने के शीर्ष पर बेरोजगारी दर।

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बेरोजगारी देश की कई प्रमुख समस्याओं में से एक हैं। हम साल दो हजार तेईस के चौथे महीने को पार कर चुके हैं और आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी दर चार महीने के शीर्ष पर हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार अप्रैल में बेरोजगारी दर बढक़र चार महीने के उच्चतम स्तर आठ दशमलव एक – एक (8.11) फीसदी पर पहुंच गई है। जबकि इससे पहले मार्च में बेरोजगारी दर सात दशमलव आठ शून्य (7.80) फीसदी पर थी।

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आज भारत में बेरोजगारी एक विकराल समस्या बन चुकी हैं। काम की तलास करने वाले आज सैकड़ों लोगो के पास काम नहीं हैं। इस देश में बेरोजगारी का आलम कुछ यूं हैं की यह हर महीने बढ़ती ही जा रही हैं।

हाल हीं में जारी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमटीई) के रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में बेरोजगारी दर बढक़र चार महीने के उच्चतम स्तर आठ दशमलव एक – एक (8.11) फीसदी पर पहुंच गई है।

जबकि इससे पहले यानी मार्च में बेरोजगारी दर सात दशमलव आठ शून्य (7.80) फीसदी पर थी। वहीं फरवरी में यह आंकड़ा सात दशमलव चार पांच (7.45) फीसदी देखी गई थी।

बताते चलें की बेरोजगारी दर का आठ दशमलव एक – एक (8.11) फीसदी होने का मतलब देश में काम करने को तैयार हर एक हजार वर्कर में से एक्यासी को काम नहीं मिल पा रहा हैं।

आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में शहरी बेरोजगारी दर आठ दशमलव पांच एक ( 8.51) फीसदी से बढक़र नौ दशमलव एक आठ (9.81) फीसदी हो गई। हालांकि अप्रैल में ग्रामीण बेरोजगारी में मामूली गिरावट देखने को मिली है। जो सात दशमलव तीन चार ( 7.34 ) फीसदी रही। जबकि एक महीने पहले यानी मार्च में यह सात दशमलव चार सात ( 7.47 ) फीसदी थी।

बताते चलें की साल दो हजार तेईस में बेरोजगारी की स्थिति बेहद चिंताजनक रही हैं। इस साल के प्रथम चार महीनों में बेरोजगारी दर में लगातार वृद्धि देखी गई हैं।

आंकड़ों के मुताबिक साल के पहले महीने यानी जनवरी में बेरोजगारी की दर सात दशमलव एक चार (7.14) फीसदी थी। जबकि यह आंकड़ा फरवरी में बढ़कर सात दशमलव चार पांच फीसदी, मार्च में सात दशमलव आठ शून्य (7.80) फीसदी और अप्रैल में यह आठ दशमलव एक एक फीसदी तक पहुंच गईं।

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