आपने यह खबर जरूर पढ़ी होगी कि सिरिलंका के सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एम.सी.सी फर्डिनेंडो ने हाल ही में संसदीय समिति कमिटी ऑन पब्लिक इंटरप्राइजेस (सीओपीई) के सामने गवाही दी थी कि उन्हें सिरिलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने बताया था कि भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने अडानी ग्रुप को 500 मेगावाट की विंड एनर्जी प्रोजेक्ट देने पर जोर दिया था। हालांकि अब उन्होंने माफी मांगते हुए यह बयान वापस लिया। उनका कहना था की वह भावूक होकर उन्होंने यह कह दिया। अब इस अधिकारी ने अपने पद का इस्तीफा भी दे दिया है।
लेकिन इससे पीएम मोदी और अदानी ग्रुप को लेकर पुनः चर्चा शुरू हो गई। जानकारी यह है कि अदानी की संपत्ति 2016 में महज 3.5 अरब डॉलर थी वर्ष 2022 में 122 अरब डॉलर हो गई है। वर्ष 2016 के मुकाबले यह कितने गुना बढ़ गई है यह आप कॉमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।
कई विशेषज्ञ कहते हैं कि मोदी काल में अदानी की संपत्ति तेजी से बढ़ी।
अदानी की संपत्ति 2014 के बाद जिस तेजी से बढ़ी है किसी ने उसे रॉकेट की गति कहा। केंद्र में 2014 से पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार है। इसी काल में कई उद्योगपतियों की संपत्ति बढ़ी है। जिसमें गौतम अदानी व मुकेश अंबानी सबसे आगे हैं। लेकिन यहां बात करेंगे अदानी के बारे में।
व्यापार उद्यम के बारे में इंटेरेस्ट रखने वाले लोग गौतम अदानी के बारे में बड़े चाव से कहते रहते हैं कि एक समय स्कूटर पर चलानेवाला व्यक्ति आज दुनिया के सबसे आमिर लोगों में से एक है। लेकिन यह कैसे संभव हुआ? इस सवाल का जवाब आप कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।
अडानी इंटरप्राइजेस, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी पोर्ट्स एन्ड सेज, अडानी पावर, अडानी ट्रांसमिशन, अडानी टोटल गैस, अडानी विल्मर, अडानी ऑस्ट्रेलिया, अडानी रियलिटी, अडानी कैप्टिकल, अडानी हाऊसिंग फाइनांस अदि कम्पनियाँ। इसके साथ अडानी इंटरप्राइजेस में करीब 15 उपकंपनियां। जिसमें माइनिंग, सोलर, डिफेन्स एन्ड एरोस्पेस, हेल्थ वेंचर, डिजिटल लैब, रोड ट्रांसपोर्ट, एयरपोर्ट्स, वाटर प्रमुख है। साथ ही अम्बुजा सीमेंट में 63 प्रतिशत भागीदारी।
इसके अलावा विदेश में भी कई प्रोजेक्ट्स। अडानी ओस्ट्रिलिया के बारे में तो खूब चर्चा है लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में सिरीलंका, बंगलादेश और म्यांमार में भी अडानी ने अपने हाथ फैलाये हैं।
2014 में फ़ोर्ब्स की वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें गौतम अडानी के बारे में कहा गया था “2.8 बिलियन डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ दुनिया में 609 वें स्थान पर, अडानी, भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह, एक बिजली कंपनी और एक कमोडिटी ट्रेडिंग व्यवसाय चलाते हैं। उनके व्यवसाय का एक बड़ा हिस्सा गुजरात में स्थित है, और गुजरात में सरकार मोदी की है, (मोदी) जो (आनेवाले) वसंत ऋतु में हो रहे राष्ट्रीय चुनावों में प्रधान मंत्री पद के पसंदीदा उम्मीदवार हैं, (मोदी) अन्य वहां उद्योगपतियों की तुलना में अडानी के प्रति अधिक उदार रहे हैं।”
आज फोर्ब्स की वेबसाइट पर दिखाया गया है कि 2016 से लेकर 2022 में अडानी की सम्पत्ति में किस प्रकार से वृद्धि हुयी है।
अडानी की नेट वर्थ में वृद्धि का कारण यह बताया जाता है कि सरकार ने जैसे जैसे निर्णय लिए वैसे वैसे अडानी ग्रुप ने प्रोजेक्ट शुरू किये। सरकार के निर्णय और अडानी ग्रुप के निर्णय की टाइमिंग पर कई लोग विश्लेषण कर रहे हैं।
जहां तक 2019 में स्क्रॉल नामक वेबसाइट पर छपे एक लेख में बताया गया है कि वर्ष 2013 में अदानी ग्रुप के पास 44 प्रोजेक्ट थे, वर्ष 2018 तक इनकी संख्या 92 हुई। पांच वर्षों के भीतर दो गुना बढ़ी।
कुछ लोगों ने यह भी तंज कसा है कि पीएम मोदी का हर सपना अडानी पूरा करेंगे।
पीएम मोदी ने आयुष्मान भारत का सपना देखा, सरकारी खर्च पर 50 करोड़ लोगों के स्वास्थ्य बीमा की घोषणा की, उधर अडाणी ने हेल्थकेयर के क्षेत्र में भी बड़े निवेश का फैसला ले लिया। ‘अडाणी हेल्थ वेंचर्स लिमिटेड’ नाम की कंपनी की स्थापना हुई है।
पीएम मोदी ने हाल ही में कहा “मेरा सपना है कि हर खेत में एक ड्रोन मौजूद हो” इसके बाद कुछ ही दिनों में खबर आयी कि गौतम अडानी ने ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया।
गंगा एक्सप्रेसवे के 36000 करोड़ रुपयों की परियोजना का काम अदानी ग्रुप और आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स के जिम्मेदारी में हैं. बताया जाता है कि यह उत्तर प्रदेश का सबसे लम्बा एक्सप्रेस वे होगा। खबर यह भी है कि अडानी की कंपनी ने गंगा एक्सप्रेस वे के काम के लिए एसबीआई से 12 हजार करोड़ रुपयों का लोन की मांग की।
पीएम मोदी ने नारा दिया “आत्म निर्भर भारत” और कहा कि सेना के उपकरण देश में ही बनेंगे। तो गौतम अडानी ने उत्तर प्रदेश गवर्मेंट के साथ एमओयू साइन किया। जिसके तहत वह कानपुर में एशिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एम्युनिशन मैन्युफैचरिंग कॉम्प्लेक्स खड़ा करेंगे।
पिछले कुछ वर्षों में अडानी ग्रुप में पोर्ट, पॉवर, रिन्यूएबल एनर्जी, गैस, आदि जो कनज्यूमर्स से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जुड़े हैं उसमें निवेश किया। जिसका अडानी को भरसक फ़ायदा मिला। इनमें कई सारे प्रोजेक्ट्स पीएम मोदी के “आत्म निर्भर भारत” से जुड़े हैं।
साथियों ऐसा नहीं है कि संपत्ति केवल अडानी की बढ़ी है, अडानी के साथ, मुकेश अम्बानी, टाटा ग्रुप, बिर्ला ग्रुप आदि अनेकों की बढ़ी है।







